विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कन्या पूजन 2026: महा अष्टमी और नवमी पर कंजक खिलाने का सबसे शुभ समय क्या है? पूरी जानकारी यहां पढ़ें

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:10 AM (IST)

शारदीय नवरात्र 2026 में कन्या पूजन की तिथियां, शुभ मुहूर्त और विधि यहां जानें। यह पूजा अष्टमी और नवमी पर ...और पढ़ें

कन्या पूजन 2026 शुभ मुहूर्त

कन्या पूजन 2026 शुभ मुहूर्त

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। हिंदू धर्म में 'कंजक पूजा' यानी 'कन्याओं की पूजा' का विशेष महत्व है। इन पवित्र दिनों में मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है।

कन्या पूजा के दौरान छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात रूप मानकर उनकी पूजा और सेवा की जाती है। इस सुंदर अनुष्ठान में नौ कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है, जिनमें से हर एक देवी के नौ रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं।

कंजक व्रत नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर मनाया जाता है। ये आठवें और नौवें दिन होता है, जो नौ दिनों के उपवास और भक्ति के भव्य समापन का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि छोटी-छोटी बच्चियों की सेवा करने से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

कन्या पूजन 2026 डेट, टाइम और मुहूर्त (Kanya Pujan 2026 Date, Time, and Muhurat)

नवरात्र के आठवें और नौवें दिन कन्या पूजा करने का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय नजरिए से ये दोनों ही दिन बेहद शुभ माने जाते हैं। साल 2026 में की तिथियों की जानकारी इस प्रकार है-

महा अष्टमी (दुर्गा अष्टमी)- 18 अक्टूबर 2026, रविवार
महा नवमी (सिद्धिदात्री)- 19 अक्टूबर 2026, सोमवार

अगर आपके परिवार में अष्टमी तिथि पर पूजा करने की परंपरा है, तो आप 18 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए कन्याओं को बुला सकते हैं। वहीं, नवमी तिथि पर व्रत तोड़ने वाले कन्या पूजन 19 अक्टूबर 2026 को करेंगे।

महा अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त 18 अक्टूबर 2026

इस साल महा अष्टमी 18 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन पड़ रही है। ऐसे में इस दिन सुबह राहुकाल का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इसलिए कन्या पूजन के लिए ये समय सबसे सही साबित हो सकता है।

सुबह का शुभ समय- सुबह 7 बजकर 45 मिनट से लेकर 9 बजकर 10 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक

महानवमी कन्या पूजन मुहूर्त 19 अक्टूबर 202

सोमवार को नवमी तिथि का असर अत्यंत खास रहने वाला है।

शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 12 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक

कंजक पूजन की सही उम्र, विधि और शुभ मुहूर्त

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, शास्त्रों में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उम्र के अनुसार उनका अलग-अलग धार्मिक महत्व होता है। इसके साथ ही एक छोटे बालक को भैरव बाबा या लांगुरा के रूप में पूजने का विधान है।

कन्या पूजन की सरल एवं शास्त्रसम्मत विधि

स्वागत एवं आदर: कन्याओं को आदरपूर्वक घर आमंत्रित करें।

पद प्रक्षालन: स्वच्छ जल या दूध से उनके पैर धोएं और उन्हें सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाएं।

तिलक एवं कलावा: माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं तथा हाथों में मौली (कलावा) बांधें।

भोग एवं भोजन: मां दुर्गा के प्रसाद के रूप में पूरी, चना और हलवा भक्तिभाव से परोसें।

उपहार एवं दक्षिणा: भोजन कराने के बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं और अपनी सामर्थ्य अनुसार फल, श्रृंगार सामग्री व दक्षिणा दें।

आशीर्वाद: अंत में उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

कंजक पूजन का शुभ मुहूर्त

अष्टमी और नवमी तिथि को प्रातःकाल सूर्योदय के बाद चौघड़िया के शुभ, लाभ या अमृत मुहूर्त में कंजक पूजन करना अत्यंत फलदायी होता है।

सर्वोत्तम समय: प्रातः 06:30 AM से 10:30 AM के मध्य का समय कन्या पूजन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

विशेष सावधानी:राहुकाल के समय पूजन करने से बचें।

यह भी पढ़ें- शारदीय नवरात्र 2026: कन्या पूजन में एक छोटी-सी भूल पड़ सकती है भारी! भूलकर भी गिफ्ट में न दें ये 3 चीजें

यह भी पढ़ें- इस बार नवरात्र पर दुर्लभ संयोग: अष्टमी-नवमी एक ही दिन! कन्या पूजन में अपनी राशि अनुसार दें ये 1 उपहार, दूर होंगे गृह दोष

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।