कन्या पूजन में किस उम्र तक की बच्चियों की पूजा करना माना जाता है शुभ? 90% लोग नहीं जानते ये शास्त्रीय नियम
शारदीय नवरात्र में जितना महत्व माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का है, उतना ही व्रत की पूर्णता के ...और पढ़ें

किस उम्र की कन्याओं की पूजा से मिलता है कौन सा फल (Picture Credit: AI Generated)
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कन्या पूजन शारदीय नवरात्र की अष्टमी या नवमी को होता है।
2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन शुभ माना गया है।
प्रत्येक उम्र की कन्या पूजन से मिलते हैं विशेष फल।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक व्रत उपवास करने के बाद कन्या पूजन का विधान सदियों से चला आ रहा है। कन्याओं के पूजन से माता दुर्गा का आशीर्वाद तो मिलता ही है और जीवन में खुशहाली भी आती है। नवरात्र का हर दिन माता दुर्गा के किसी न किसी स्वरूप को समर्पित होता है।
इन सभी दिनों के पूजन के बाद अष्टमी या नवमी तिथि के दिन कन्याओं का पूजन नियम पूर्वक किया जाता है। ऐसा करने से व्रत और पूजन का पूर्ण फल मिलता है।
अक्सर लोग इस बारे में नहीं जानते हैं कि कन्या पूजन करने वाली कन्याओं की सही उम्र क्या होनी चाहिए और आपको किस उम्र की कन्या के पूजन से क्या फल मिलता है। आइए आपको बताते हैं इससे जुड़े कुछ शास्त्रीय नियमों के बारे में।
किस उम्र की बच्चियों का कन्या पूजन शुभ माना जाता है?
देवी भगवत पुराण के अनुसार, शारदीय नवरात्र में हमेशा 2 से 10 साल तक की उम्र की कन्याओं का पूजन करना चाहिए। वहीं 2 साल से छोटी कन्याओं को भी पूजन के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
2 साल की कन्या को कुमारी, 3 साल की कन्या त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कल्याणी, 5 साल की रोहिणी, 6 साल की कन्या कलिका, 7 वर्ष की चंडिका, 8 साल की शाम्भवी, 9 साल की दुर्गा और 10 साल की कन्या को सुभद्रा के रूप में पूजा जाता है।
आपको भूलकर भी 10 वर्ष से अधिक की कन्या का पूजन नहीं करना चाहिएवहीं कन्या पूजन के दौरान एक छोटे बालक की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस बालक को भैरव बाबा का रूप माना जाता है।
किस उम्र की कन्या को पूजने से क्या फल मिलते हैं?
ऐसा कहा जाता है कि आपको अपनी किसी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सही उम्र की कन्या का पूजन करना चाहिए।
- दो वर्ष की उम्र जिसे कुमारी कहा जाता है उसके पूजन से दुख दरिद्रता शत्रुओं का नाश होता है और धन, आयु तथा बल में वृद्धि होती है।
- तीन साल की यानी कि त्रिमूर्ति नाम की कन्या का पूजन करने से धन धान्य आगम होता है पुत्र और पौत्र को प्राप्त करते हैं।
- चार साल की कन्या जिसे कल्याणी कहा जाता है उस कन्या का पूजन करने से विद्या प्राप्त होती है कार्यों में विजय प्राप्त होती है और राज सुख मिलता है।
- पांच साल की कन्या जिसे रोहिणी कहा जाता है उसका पूजन करने से रोगों का नाश होता है।
- छः वर्ष की कन्या जिसे कालिका कहा जाता है उसका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है।
- सात साल की चंडिका स्वरूप कन्या का पूजन करने से धन ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।
- आठ साल की शाम्भवी स्वरूप की कन्या का पूजन करने से दुख का नाश होता है तथा संग्राम में विजय प्राप्त होती है।
- नौ साल की उम्र जिसे दुर्गा नाम की कन्या का रूप माना जाता है उसका पूजन करने से व्यक्ति के समस्त शत्रुओं का नाश होता है।
- दस साल की कन्या जो सुभद्रा का रूप होती है उसका पूजन करने से वयक्ति के सभी मनोरथों की सिद्धि होती है।
अगर आप इनमें से किसी भी मनोकामना की पूर्ति की इच्छा रखते हैं तो आपको नवरात्र की अष्टमी या नवमी तिथि पर इन्हीं संख्याओं के अनुसार कन्याओं का पूजन करना चाहिए।
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