विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

शारदीय नवरात्र में सूतक या पातक लग जाए तो कैसे करें मां दुर्गा की पूजा? ज्योतिषाचार्य ने बताया सही नियम

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:00 PM (GMT+05:30)

शारदीय नवरात्र के दौरान सूतक या पातक काल लगने पर मां दुर्गा की पूजा कैसे करें, इस पर ज्योतिषी चंद्रेश ...और पढ़ें

सूतक या पातक काल में क्या न करें? (Picture Credit: AI Generated)

सूतक या पातक काल में क्या न करें? (Picture Credit: AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) के पर्व को मां दुर्गा की उपासना के लिए पवित्र समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान सच्चे मन से मां दुर्गा की साधना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं।

शारदीय नवरात्र के दौरान सूतक या पातक काल लगने पर पूजा-पाठ को लेकर लोग परेशान हो जाते हैं कि सूतक या पातक काल के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए या नहीं? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परिवार में किसी बच्चे का जन्म होने पर सूतक काल लगता है।

वहीं, परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर पातक काल लगता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार बताते हैं कि शारदीय नवरात्र के दौरान सूतक या पातक काल में पूजा कर सकते हैं या नहीं?

सूतक या पातक काल में पूजा कर सकते हैं या नहीं?

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, शास्त्रों और धर्मशास्त्र विधान (जैसे निर्णयसिंधु और धर्मसिंधु) के अनुसार सूतक (जन्म का अशुद्धि काल) या पातक (मृत्यु का अशुद्धि काल) के दौरान स्पर्श पूजा और प्रत्यक्ष कर्मकांड वर्जित माने गए हैं।

सूतक या पातक काल के दौरान ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम व उपाय

स्पर्श वर्जित: इस अवधि में आप मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते, न ही देवी की मूर्ति, घट (कलश) या पूजा सामग्री को स्पर्श कर सकते हैं।
मानसिक जप एवं पाठ: आप मन ही मन मंत्र जाप (जैसे 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे') या 'दुर्गा सप्तशती' का मानसिक पाठ कर सकते हैं।
संकल्प रहित व्रत: आप बिना किसी भौतिक संकल्प के या केवल मानसिक भावना से फलाहार का व्रत रख सकते हैं।
अन्य द्वारा पूजन: आप किसी अन्य पुरोहित या ऐसे रिश्तेदार अथवा मित्र से, जो सूतक-पातक से मुक्त हों, अपने नाम का संकल्प करवाकर पूजा एवं अखंड ज्योति प्रज्वलित करवा सकते हैं।

सूतक या पातक काल में क्या न करें

  • सूतक या पातक काल के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों या तस्वीरों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस दौरान मंदिर जाने की मनाही है।
  • इसके अलावा तुलसी के पौधे में जल भी नहीं देना चाहिए।
  • सूतक या पातक काल की अवधि के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करने की मनाही है। इसके अलावा किसी नए काम की भी शुरुआत न करें।

यह भी पढ़ें- शारदीय नवरात्र: सपने में मां दुर्गा ने दिए दर्शन? स्वप्न शास्त्र के अनुसार मिलते हैं ये हैरान करने वाले संकेत

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।