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शारदीय नवरात्र 2026: 9 देवियां, 9 ग्रह और 9 दिन... किस माता के आशीर्वाद से किस ग्रह को मिलेगी मजबूती?

Published: Mon, 12 Oct 2026 01:38 PM (IST)

नवरात्रि (Shardiya Navratri 2026) में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा से नवग्रहों को मजबूत करने के उपाय बताए ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र और ग्रहों का संबंध

शारदीय नवरात्र और ग्रहों का संबंध

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू परंपरा में नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) का अत्यंत महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, एक साल में करीब 4 बार नवरात्रि आती है। जिसमें 'माघ' और 'आषाढ़' की नवरात्र देवताओं के लिए 'चैत्र' और 'आश्विन माह की शरद नवरत्रि' मनुष्यों के लिए होती है।

इस साल मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित नवरात्र 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो चुकी है, जिसका समापन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार के दिन होगा।

ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, मां दुर्गा में नवग्रहों का वास माना गया है। ऐसे में यह नौ दिन न सिर्फ माता रानी की पूजा-अर्चना, व्रत और साधना के लिए जरूरी है बल्कि कुंडली में ग्रहों को मजबूत करने का भी सुनहरा मौका है। नवरात्र के नौ दिन 9 अलग- अलग ग्रहों से भी जुडे़ माने जाते हैं। आइए जानते हैं इन्हें मजबूत करने के उपाय के बारे में।

शैलपुत्री देवी

ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्र का प्रथम दिन मां शैलपुत्री देवी को समर्पित है। ऐसे में सूर्य की प्रसन्नता के लिए पहले दिन मां शैलपुत्री की विधिवत रूप से पूजा करनी चाहिए।

ऐसा करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे समाज में मान-सम्मान बढ़ने के साथ समृद्धि मिलती है।

ब्रह्मचारिणी देवी

मां ब्रह्मचारिणी का संबंध चंद्र ग्रह से माना गया है। नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक अवसाद की परेशानी से छुटकारा मिलता है।

इसके अलावा मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है, जो निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाती है।

चंद्रघंटा देवी

चंद्रघंटा देवी मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप है, जिनका सबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। मार्केंडेय पुराण में मंगल ग्रह को सिर्फ एक लाल ग्रह ही नहीं, बल्कि उन्हें ऊर्जा, पराक्रम और भूमि का कारक माना गया है।

मां दुर्गा और मंगल ग्रह दोनों को शक्ति, प्रतिरोध, संघर्ष और विजय का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा की पूजा करना बेहद जरूरी माना गया है।

कुष्मांडा देवी

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कुष्मांडा देवी जिन्हें पर्यावरण की देवी के तौर पर भी पूजा जाता है। मां कूष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से जुड़ा है। मां कूष्मांडा जिन्हें बुद्धि, वाणी, सौंदर्य, व्यापारिक सफलता की देवी माना जाता है।

बुध दोष से प्रभावित व्यक्ति को मां की भक्ति से फायदा मिल सकता है। मां कुष्मांडा की विशेष कृपा से वाणी, ध्यान, त्वचा, व्यवसाय और वित्तीय वृद्धि होती है।

स्कंदमाता देवी

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप स्कंदमाता देवी का है। ज्योतिष शास्त्र में स्कंदमाता देवी का संबंध देवगुरु बृहस्पति से है। माना जाता है कि स्कंदमाता की उपासना से कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है।

इसलिए नवरात्र के पांचवें दिन पीले रंग का वस्त्र धारण करें और मां के सामने बैठकर उनकी सच्चे मन से उपासना करें।

कात्यायनी देवी

ज्योतिष शास्त्र में कात्यायनी देवी का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है। महाभारत काल में अर्जुन ने जीत हासिल करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा की थी। विवाह और मान-सम्मान प्राप्त करने के लिए मां कात्यायी की उपासना खासतौर पर की जाती है।

नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। अंक 6 प्रेम, सद्भाव, सौंदर्य और जिम्मेदारी का माना जाता है, जिसके शासक शुक्र ग्रह हैं।

कालरात्रि देवी

कालरात्रि देवी जिन्हें रात्रि की देवी भी कहा जाता है। इनकी पूजा करने से समस्त बाधाएं, वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। कालरात्रि देवी का संबंध शनि ग्रह से है। ऐसे में इस नवरात्रि 7वें दिन मां की पूजा सिर्फ आपको नकारात्मक ऊर्जा से बचाएगी ही नहीं, बल्कि शनि की कृपा के पात्र भी बनाएगी।

महागौरी देवी

मां दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी देवी, जिन्हें सिद्धि प्रदान करने वाली माता के रूप में भी पूजा जाता है। यह तमस को हटाकर उजाले की ओर ले जाती है। महागौरी देवी का संबंध राहु ग्रह से जुड़ा माना जाता है।

सिद्धिदात्री देवी

मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री देवी जिनका संबंध केतु से जुड़ा माना गया है। मां की पूजा करने से मोक्ष और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।