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    Sawan somvar Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरी है सावन सोमवार की पूजा, जरूर करें इसका पाठ

    By Jagran News Edited By: Pravin Kumar
    Updated: Mon, 14 Jul 2025 07:30 AM (IST)

    सावन (Sawan Somwar Vrat Katha) का महीना बेहद पावन होता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। साथ ही सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की महिमा का वर्णन शास्त्रों में निहित है। भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है।

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    Sawan 2025: सावन सोमवार व्रत कथा का धार्मिक महत्व

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में सावन सोमवार का व्रत केवल एक नियम नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मिक जुड़ाव की गहराई से जुड़ा एक दिव्य साधन है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग है, बल्कि भगवान शिव के चरणों में समर्पण का प्रतीक भी है।

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    ऐसी ही अपार श्रद्धा और अटूट भक्ति की एक प्रेरणादायक कथा है। एक साहूकार की जिसकी वर्षों की शिव आराधना ने न केवल उसे संतान सुख का वरदान दिलाया, बल्कि उसके पुत्र को मृत्यु के द्वार से भी लौटा लाया। आज सावन के पावन मास में हम आपके लिए लाए साहूकार की भक्ति की कथा (Sawan Somwar katha importance)।

    संतान प्राप्ति की कामना में शिव भक्ति: साहूकार की आस्था की कथा

    प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक धनी साहूकार (बड़ा व्यापारी) रहता था। उसके पास धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति की कामना से वह साहूकार हर सोमवार को श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करता और शाम को शिव मंदिर में जाकर दीप जलाता था।

    सालों तक उसकी यही भक्ति चलती रही। उसकी निष्ठा देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा, “प्रभु! यह भक्त वर्षों से आपकी आराधना कर रहा है, फिर भी आप इसे संतान का सुख क्यों नहीं दे रहे? भगवान शिव ने उत्तर दिया कि, “इस भक्त के पूर्व जन्म के कर्म ऐसे हैं कि इसके भाग्य में संतान सुख नहीं है। लेकिन माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने साहूकार को सपने में दर्शन दिए और एक पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, साथ ही यह भी बताया कि वह पुत्र केवल 14 वर्ष की आयु तक ही जीवित रहेगा।

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    काशी की यात्रा और विवाह प्रसंग

    कुछ समय बाद साहूकार के घर एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने "अमर" रखा। जब अमर 11 वर्ष का हुआ, तो साहूकार ने उसे शिक्षा के लिए मामा के साथ काशी भेजा। मार्ग में उन्होंने यज्ञ कर ब्राह्मणों को भोजन कराया और दान भी दिया। यात्रा के दौरान वे एक नगर में रुके, जहां राजा की पुत्री का विवाह होने वाला था। दूल्हा एक आंख से अंधा था, और राजा को डर था कि यह बात राजकुमारी को न पता चल जाए।

    उसने अमर से विनती की कि वह विवाह में कुछ समय के लिए दूल्हा बनकर मंडप में बैठ जाए इस बात के लिए अमर ने सहमति दे दी। विवाह के बाद अमर काशी चला गया, लेकिन राजकुमारी को पत्र लिखकर सच्चाई बता दी। राजकुमारी ने सच्चाई जानकर असली दूल्हे से विवाह करने से मना कर दिया। काशी में अमर ने पूरी निष्ठा से अध्ययन किया। जब वह 14 वर्ष का हुआ, तब एक यज्ञ के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और वह मूर्छित होकर गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई। उसके मामा विलाप करने लगे।

    उसी समय उस मार्ग से भगवान शिव और माता पार्वती जा रहे थे। माता पार्वती ने विलाप सुनकर भगवान से आग्रह किया कि उस दुखी व्यक्ति की सहायता करें। भगवान शिव ने बताया कि यह वही साहूकार का पुत्र है जिसे उन्होंने वरदान दिया था।

    माता की करुणा, शिव की कृपा

    माता पार्वती ने पुनः करुणा भाव से विनती की, प्रभु, इस बालक का पिता बीते 14  वर्षों से पूरी श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखता आया है और हर सप्ताह आपके चरणों में दीप अर्पित करता है। कृपया उसकी भक्ति का मान रखिए और इस बालक के कष्ट हर लीजिए। भगवान शिव माता की करुणा से प्रसन्न हुए और अमर को जीवनदान दे दिया।

    इसके बाद अमर, अपने मामा के साथ काशी से लौट आया। रास्ते में वह उसी नगर पहुंचा जहां उसका विवाह हुआ था। राजकुमारी उसे पहचान गई और इस बार विधिवत रूप से उसका स्वागत कर विदाई दी गई। घर पहुंचने पर जब माता-पिता ने अमर को जीवित और वधु सहित देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भगवान शिव की कृपा से उनका पुत्र न केवल मिला, बल्कि मृत्यु से भी बच गया।

    आस्था से अमरत्व तक की यात्रा

    इस प्रकार भगवान शिव की सच्ची और निरंतर भक्ति से (Sawan Somwar Vrat Katha) साहूकार को न केवल संतान का सुख मिला, बल्कि उसके पुत्र को जीवनदान भी प्राप्त हुआ। यह कथा हमें सिखाती है कि श्रद्धा और भक्ति से असंभव भी संभव हो सकता है। सावन सोमवार की इस पावन कथा (Sawan Somwar Puja) का श्रवण करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में शिव कृपा बनी रहती है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए  hello@astropatri.com पर संपर्क करें।