Sawan 2025: क्यों देवों के देव महादेव को प्रिय है बेलपत्र और क्या है इसकी कथा?
जब भक्त भगवान शिव को त्रिपत्र (तीन पत्तियों वाला बेलपत्र) अर्पित करते हैं तो वे अपने भीतर की शक्तियों को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। यह अर्पण केवल एक पत्र चढ़ाने की क्रिया नहीं होती। इसके माध्यम से भक्त अपने तन मन और आत्मा को महादेव (Sawan 2025) को समर्पित करते हैं।

आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। हिंदू पूजा-पद्धति में हर वस्तु का एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ होता है। ऐसा ही एक पवित्र प्रतीक है बेलपत्र, जिसे भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माना गया है। चाहे मंदिरों की पूजा हो या घर का अभिषेक, बेलपत्र का प्रयोग शिवलिंग पर करना एक गहन श्रद्धा का प्रतीक होता है। सावन मास (Sawan 2025) और शिवरात्रि जैसे पर्वों पर यह अर्पण और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
पौराणिक महत्व
शिव पुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में बेलपत्र का विशेष उल्लेख है। एक कथा के अनुसार, माता पार्वती के पसीने से यह बेल वृक्ष प्रकट हुआ था और माता स्वयं इसकी हर शाखा, जड़, पत्ती और फल में निवास करती हैं। इस कारण बेलपत्र (Why Lord Shiva Loves Belpatra) को शिव-पूजन में सर्वोच्च माना गया है। जैसे देवी पार्वती की ऊर्जा को ही शिवलिंग पर अर्पित किया जा रहा हो।
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एक अन्य कथा में बताया गया है कि एक वनवासी भक्त जो किसी विधि-विधान को नहीं जानता था, उसने प्रेमवश बेल के पत्ते तोड़कर शिवलिंग पर अर्पित कर दिए। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष प्रदान किया। यह कथा बताती है कि महादेव विधि नहीं, हृदय की भावना को स्वीकार करते हैं।
बेलपत्र का प्रतीकात्मक अर्थ- त्रिपत्र में समाया शिवतत्त्व
प्रायः पूजा में जो बेलपत्र चढ़ाया जाता है उसमें तीन पत्तियां होती हैं। ये त्रिपत्र गहन आध्यात्मिक अर्थ रखते हैं-
- भगवान शिव की तीन आंखें- सूर्य, चंद्र और अग्नि
- तीन गुण- सत्व (शुद्धता), रज (क्रिया), तम (निष्क्रियता)
- "ॐ" के तीन अक्षर- सृष्टि, पालन और संहार की ध्वनि
जब भक्त भगवान शिव को त्रिपत्र (तीन पत्तियों वाला बेलपत्र) अर्पित करते हैं, तो वे अपने भीतर की शक्तियों को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। यह अर्पण केवल एक पत्र चढ़ाने की क्रिया नहीं होती। इसके माध्यम से भक्त अपने तन, मन और आत्मा को महादेव को समर्पित करते हैं।
ऐसा भी विश्वास है कि बेलपत्र अर्पित करने से सबसे भारी पाप भी क्षमा हो सकते हैं। क्योंकि शिव पुराण में कहा गया है कि-
“बिल्वपत्रं प्रयच्छामि त्रिपत्रं शुद्धमुत्तमम्।
शम्भोः प्रीतिकरं देवि बिल्वपत्रमुपास्महे॥”
अर्थ:- मैं यह पवित्र बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करता हूं, जो उन्हें अत्यंत आनंद और प्रसन्नता प्रदान करता है।
यह सरल अर्पण-वाक्य केवल शब्द नहीं, बल्कि भक्ति और समर्पण की सुगंध लिए प्रभु के चरणों में अर्पित एक भावपूर्ण पुष्प के समान है।
आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी विशेष
आध्यात्मिक महत्त्व के साथ-साथ बेलपत्र का स्थान आयुर्वेद में भी ऊंचा है। इसमें प्राकृतिक रोग-नाशक, शरीर को ठंडक देने वाले और पाचन शक्ति बढ़ाने वाले गुण होते हैं। प्राचीन ऋषि-मुनि वन में रहते समय इस वृक्ष का उपयोग दीर्घायु और रोगों से बचने के लिए करते थे।
शिवजी स्वयं योगियों के ईश्वर माने जाते हैं शरीर से विरक्त, परंतु परम चेतना से जुड़े हुए। बेलपत्र उनके तपस्वी स्वभाव को संतुलित करता है। यह माना जाता है कि यह पत्र शिव की अग्निमयी ऊर्जा को शांत करने का भी कार्य करता है।
पूजा में बेलपत्र का प्रयोग और भक्ति भाव
शिव मंदिरों में अभिषेक के समय शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित किया जाता है। यह गंगाजल, दूध, शहद और अन्य पवित्र द्रव्यों के साथ उपयोग होता है। जब भक्त बेलपत्र चढ़ाते हैं, तो वे साथ में "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं। यह मंत्र और अर्पण का मेल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
कुछ बातों का रखें विशेष ध्यान-
- बेलपत्र स्वच्छ होने चाहिए।
- बेलपत्र खंडित नहीं होने चाहिए।
- बेलपत्र का डंठल (तना) भगवान की ओर न हो, बल्कि विपरीत दिशा में हो।
निष्कर्ष
सोमवार के दिन इस अर्पण का विशेष महत्व होता है। और सावन मास में तो करोड़ों भक्त कांवड़ यात्रा के माध्यम से गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करके शिव भक्ति में लीन हो जाते हैं।
बेलपत्र भले ही आकार में छोटा और साधारण हो, परंतु यह भक्ति, नम्रता और आत्मसमर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
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यह हमें याद दिलाता है कि ईश्वर को भव्यता नहीं, हृदय की सच्चाई प्रिय होती है।
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि वह आत्मिक संवाद है जो मनुष्य को भगवान से जोड़ता है। जहां सिर झुकता है, वहां कृपा बरसती है।
सावन मास की शुभकामनाएं
यह पावन समय भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन में भक्ति, शांति और समृद्धि की गंगा बहाए।
हर अभिषेक में आशीर्वाद बरसे, हर "ॐ नमः शिवाय" में शिवशक्ति का स्पर्श आपको आभास हो।
हर हर महादेव।
लेखक: आनंद सागर पाठक, Astropatri.com प्रतिक्रिया देने के लिए संपर्क करें: hello@astropatri.com
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