नरक चतुर्दशी पर यमराज ही नहीं पितरों के लिए भी जलता है दीया, इसके धार्मिक रहस्य को समझें
नरक चतुर्दशी पर यमराज और पितरों के लिए दीपक जलाने का महत्व है। यह पर्व अकाल मृत्यु के भय को ...और पढ़ें

नरक चतुर्दशी दीपक जलाने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
नरक चतुर्दशी पर यम और पितरों के लिए दीपक जलाएं।
अकाल मृत्यु भय दूर होता, पितृ दोष से मुक्ति मिलती।
घर में 14 दीपक विभिन्न स्थानों पर प्रज्वलित करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दीवाली या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह दीवाली के ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है और इस दिन को भगवान कृष्ण की राक्षस नरकासुर पर जीत की याद में मनाया जाता है। यह अंधकार पर प्रकाश की और अशुद्धता पर शुद्धता की जीत का प्रतीक भी है।
इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है दीपक जलाना। मुख्य रूप से धर्मराज यम के निमित्त चौमुखी दीपक जलाने का विधान है ताकि अकाल मृत्यु का भय दूर हो सके। इसके साथ ही शास्त्रों और सनातन परंपरा के अनुसार, इस दिन पितरों के लिए भी दीपदान करने का विशेष महत्व माना गया है।
इस दिन मुख्य रूप से यम के नाम का दीपक घर की दक्षिण दिशा में जलाया जाता है जिससे यम देव को प्रसन्न किया जा उसके। आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा से जानते हैं इस दिन पूर्वजों के नाम से दीपक जलाना क्यों जरूरी है और इसका क्या महत्व है?
नरक चतुर्दशी कितने दीपक जलाए जाते हैं
नरक चतुर्दशी मुख्य रूप से कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, इसलिए इस दिन 14 दीपक घर की अलगपालग दिशाओं में जलाए जाते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान यम के सम्मान में दीये जलाने से घर में सदैव खुशहाली बनी रहती है और व्यक्ति को मृत्यु का भय नहीं सताता है।
इस दिन यम का दीपक जलाने के बाद उनसे दीर्घायु की कामना की जाती है और परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। नरक चतुर्दशी की रात यम का दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जाएं दूर रहती हैं और घर में कोई बुरी शक्ति प्रवेश नहीं करती है।
क्या नरक चतुर्दशी पर पूर्वजों के नाम का दीपक भी जलाना चाहिए?
ऐसा माना जाता है कि घर की दक्षिण दिशा यम और पूर्वजों की होती है। अगर आप नारक चतुर्दशी पर यम के साथ पूर्वजों के नाम का चौमुखी दीपक जलाते हैं तो आपके घर से सभी प्रकार के पितृ दोष दूर होते हैं।
आप इस दिन पूर्वजों के नाम का दीपक घर के मुख्य द्वार पर भी रख सकते हैं और घर की समृद्धि की कामना कर सकते हैं। यही नहीं आप दीपक जलाने के बाद पूर्वजों से पितृ दोष मुक्ति की कामना भी करें, तो आपके लिए अत्यंत शुभ होगा।
पितरों के लिए दीपदान का महत्व और नियम
पितरों की विदाई और मार्गदर्शन: दीपावली अमावस्या से ठीक एक दिन पहले चतुर्दशी तिथि पड़ती है। इस दिन पितरों की विदाई और उनकी आत्मा की संतुष्टि के लिए दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं, ताकि वे अपने लोक को सुगमता से लौट सकें और परिवार को अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान करें।
दीपदान का स्थान: यह दीपक सामान्यतः घर की दक्षिण दिशा में, मुख्य द्वार के बाहर या पीपल के पेड़ के नीचे जलाया जाता है।
उद्देश्य: यह विशेष दीपदान यमराज और पितरों दोनों को समर्पित होता है, जिससे घर-परिवार पर आने वाले समस्त संकट दूर होते हैं।
नरक चतुर्दशी पर कितने दीये जलाने चाहिए?
धर्मग्रंथों के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन 14 दीये घर के अलग-अलग स्थानों पर जलाने चाहिए। इससे किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद मिलती है।
- इस दिन एक दीपक भगवान यम के लिए मुख्य द्वार पर जलाएं, इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
- दूसरा दीपक तुलसी के पौधे के पास रखें, इससे घर में माता लक्ष्मी का वास होता है।
- तीसरा दीपक किचन में जलाएं जिससे माता अन्नपूर्णा का वास घर में बना रहता है।
- चौथा दीपक घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए जलाएं।
- इस प्रकार आप 14 दीपक अलग-अलग स्थानों जैसे बाथरूम,स्टोर रूम, बालकनी, छत,बेडरूम, ब्रह्मस्थान, पीपल के पेड़ के पास लगाएं।
अगर आप भी नरक चतुर्दशी के दिन सही विधि से दीपदान करेंगे तो पूर्वजों और यम देव का आशीर्वाद आपके घर में सदैव बना रहेगा।
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