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नरक चतुर्दशी पर क्यों निभाई जाती है अभ्यंग स्नान की खास परंपरा? नरकासुर वध से जुड़ा रहस्य कर देगा हैरान

Published: Sun, 01 Nov 2026 11:16 AM (IST)

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की परंपरा का विशेष महत्व है, जो दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। ...और पढ़ें

कैसे करें अभ्यंग स्नान (Picture Credits- AI Images)

कैसे करें अभ्यंग स्नान (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का विधान।


  2. भगवान कृष्ण ने नरकासुर वध के बाद यह स्नान किया था।

  3. पापों और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi 2026) के पर्व का बहुत महत्व है। इसे दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है, जिसे छोटी दिवाली या रूप चौदस भी कहते हैं। नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय होने से पहले अभ्यंग स्नान करने का विधान है। इसके अलावा इस दिन यमराज और भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और शुभ परिणाम मिलते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है और इसके पीछे की क्या वजह है? आइए इस आर्टिकल में आपको इसकी वजह के बारे में बताते हैं

अभ्यंग स्नन का 

हिंदू धर्म में नरक चतुर्दशी पर 'अभ्यंग स्नान' की एक बेहद खास और प्राचीन परंपरा निभाने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर तिल के तेल और उबटन से स्नान किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पापों और अकाल मृत्यु के भय से छुटकारा मिलता है।

क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान?

पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर ने इंद्रदेव को हराकर उन्हें स्वर्ग से निकाल दिया था। इसके बाद नरकासुर ने तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया था और वह देवताओं व ऋषियों पर अत्याचार करने लगा। इसलिए कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वधकिया। युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने शरीर पर लगे रक्त को साफ करने के लिए तेल और उबटन से स्नान किया था, जिसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। इसलिए नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने का विशेष महत्व है। नरकासुर वध का वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है।

अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त

नरक चतुर्दशी 07 नवंबर को है। इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 37 मिनट पर होगा। इसलिए इस समय से पहले ही अभ्यंग स्नान कर लें।

अभ्यंग स्नान विधि

  • नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें।
  • इसके बाद शरीर और बालों में तिल के तेल की अच्छी तरह मालिश करें।
  • फिर हल्दी, चंदन और बेसन से बना उबटन लगाएं।
  • इसके बाद साफ पानी से स्नान करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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