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धनतेरस से भाई दूज तक क्यों जलाते हैं दीपक? 5 दिनों की इस परंपरा के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य

Published: Sun, 01 Nov 2026 10:00 AM (IST)

दीपावली के पांच दिवसीय पर्व में धनतेरस से भाई दूज तक दीपक जलाने की परंपरा का गहरा महत्व है। यह ...और पढ़ें

5 दिन, 5 पर्व और दीपक का गहरा रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

5 दिन, 5 पर्व और दीपक का गहरा रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली के पर्व का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज पर होता है। इस दौरान रोजाना शाम को दीपक जलाने का विशेष महत्व है। यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस से लेकर भाई दूज तक दीपक क्यों जलाए जाते हैं और इसके पीछे की असली वजह क्या है? अगर नहीं, तो आइए विस्तार से इसके रहस्य के बारे में जानते हैं।

धनतेरस से भाई दूज तक दीपक जलाने का महत्व

धनतेरस: दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा में यम का दीपक जलाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

छोटी दीवाली (नरक चतुर्दशी): पौराणिक कथा के अनुसार, छोटी दीवाली के अवसर पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और 16,100 राजकुमारियों व बंदियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन भय और अंधकार पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में दीप जलाए जाते हैं।

दीवाली: कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए थे। उनके आगमन की खुशी में नगरवासियों ने दीपक जलाकर प्रभु का स्वागत किया था। इसलिए दीवाली के दिन दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। दीयों की रोशनी अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर जीवन में ज्ञान, सुख और समृद्धि लाती है।

गोवर्धन पूजा: दीपोत्सव के चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में ब्रज के लोग देवराज इंद्र की पूजा करते थे। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जिससे हमारी गायों को चारा और हमें जीवन मिलता है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोड़ा था और गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसके बाद लोगों ने प्रभु को 56 भोग अर्पित किए और दीप जलाए। इसी वजह से गोवर्धन पूजा के दिन दीपक जलाने का विधान है।

भाई दूज: यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनका तिलक करती हैं और दीप जलाकर उनकी आरती उतारती हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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