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    Krishna Janmashtami 2025: इंद्र और शिववास योग में मनाई जाएगी मासिक जन्माष्टमी, पूरी होगी मनचाही मुराद

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Tue, 13 May 2025 07:38 PM (IST)

    हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2025) मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव देव और जगत के पालनहार भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। अष्टमी तिथि पर मंदिरों में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा की जाती है।

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    Krishna Janmashtami 2025: भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न करें?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 20 मई को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। साथ ही भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए साधक अष्टमी का व्रत भी रखते हैं। इस व्रत को करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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    ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर इंद्र और शिववास योग समेत कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा करने से साधक पर मुरली मनोहर की कृपा बरसेगी। आइए, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं।

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    मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त

    ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 मई को सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 21 मई को सुबह 04 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। 20 मई को पूजा के लिए शुभ समय देर रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 38 मिनट तक है। 

    इंद्र योग

    ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर इंद्र योग का संयोग है। इंद्र योग का संयोग देर रात 02 बजकर 50 मिनट तक है। इस दौरान भगवान कृष्ण की पूजा से साधक को सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। साथ ही सभी दुख एवं संकट दूर हो जाएंगे।

    शिववास योग

    ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर शिववास योग का भी संयोग है। इस इस शुभ अवसर पर देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां पार्वती के साथ रहेंगे। भगवान शिव अष्टमी तिथि पर दिन भर कैलाश पर विराजमान रहेंगे।

    नक्षत्र एवं करण

    ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग शाम 07 बजकर 32 मिनट तक है। इसके बाद शतभिषा नक्षत्र का निर्माण होगा। इसके साथ ही बव, बालव एवं कौलव करण के संयोग हैं।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 28 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 07 बजकर 08 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 04 बजकर 46 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 29 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 07 मिनट से 07 बजकर 27 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक

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    भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र

    1. ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे।

    सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।

    2. हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

    हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।

    3. ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः

    4. ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात

    5. ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे।

    सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।

    श्री कृष्णाष्टकम्

    भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं,

    स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम् ।

    सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं,

    अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥

    मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं,

    विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।

    करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं,

    महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ॥

    कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं,

    व्रजाङ्गनैकवल्लभं नमामि कृष्ण दुर्लभम् ।

    यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया,

    युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥

    सदैव पादपङ्कजं मदीयमानसे निजं

    दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।

    समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं,

    समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥

    भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं,

    यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।

    दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनं,

    दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसंभवम् ॥

    गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं,

    सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनम् ।

    नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलंपटं,

    नमामि मेघसुन्दरं तटित्प्रभालसत्पटम् ॥

    समस्तगोपनन्दनं हृदंबुजैकमोदनं,

    नमामि कुञ्जमध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम् ।

    निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं,

    रसालवेणुगायकं नमामि कुञ्जनायकम् ॥

    विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं,

    नमामि कुञ्जकानने प्रवृद्धवह्निपायिनम् ।

    यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा,

    मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम् ॥

    प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य यः पुमान् ।

    भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान् ॥

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।