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    Magh Snan 2026: संगम तट नहीं जा पाए? जानें घर पर माघ स्नान करने की सही विधि और नियम

    By Digital DeskEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 03:25 PM (IST)

    माघ महीने में स्नान, दान और साधना का विशेष महत्व है। अगर इस माह में गंगा स्नान करना मुश्किल है, तो आप घर पर ही माघ स्नान (Magh 2026) कर सकते हैं। हाला ...और पढ़ें

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    Magh 2026: माघ स्नान का महत्व।

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। Magh Snan 2026: सनातन परंपरा में माघ मास को स्नान, दान और साधना का विशेष काल माना गया है। वर्ष 2026 में माघ मास का आरंभ 4 जनवरी से हो चुका है और इसी के साथ माघ मेले व गंगा स्नान की परंपरा भी प्रारंभ हो जाती है। हालांकि, कई श्रद्धालु किसी भी वजह से प्रयागराज या अन्य तीर्थ क्षेत्रों में माघ मेले तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में शास्त्रों में घर पर माघ स्नान करने की भी स्पष्ट और फलदायी विधि बताई गई है, जिससे श्रद्धालु पुण्य लाभ से वंचित न रहें।

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    माघ स्नान का धार्मिक महत्व क्या है?

    माघ स्नान को आत्मशुद्धि और पापक्षय का प्रमुख साधन माना गया है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में जल में विशेष दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, जिससे स्नान करने मात्र से मन, शरीर और विचार शुद्ध होते हैं। मान्यता है कि इस मास में नियमित स्नान करने से तीर्थ स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है। माघ स्नान केवल शारीरिक शुद्धि नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का माध्यम भी माना गया है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

    घर पर माघ स्नान करने की विधि

    यदि तीर्थ स्नान संभव न हो, तो घर पर ही माघ स्नान पूरी श्रद्धा से किया जा सकता है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान से पहले सूर्य और जल देवता का स्मरण करें। स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाना उत्तम माना जाता है। तिल या कुशा (पवित्र घास) का प्रयोग कर स्नान करना भी शास्त्रसम्मत है। स्नान के समय मौन, जप या भगवान विष्णु का स्मरण करना विशेष फलदायी माना गया है।

    माघ स्नान के साथ किन नियमों का रखें ध्यान?

    माघ मास में केवल स्नान ही नहीं, बल्कि संयमित जीवनशैली भी आवश्यक मानी गई है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संभव हो तो पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें। इस अवधि में सात्विक भोजन, सीमित निद्रा और संयमित वाणी का पालन करना चाहिए। क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखना आवश्यक माना गया है। साथ ही, दान, जप और सेवा करने से माघ स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

    घर पर माघ स्नान से भी मिलता है पूर्ण पुण्य

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियम ही माघ स्नान का मूल आधार है। यदि मन शुद्ध है और विधि का पालन किया गया है, तो घर पर किया गया माघ स्नान भी तीर्थ स्नान के समान फल देता है। यह साधना व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करती है। माघ मास में नियमित स्नान और संयम से किया गया आचरण जीवन में स्थायित्व और आंतरिक बल को मजबूत करता है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।