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    Kamika Ekadashi 2025 Fast Rules: कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं? अभी नोट करें व्रत नियम

    Updated: Tue, 08 Jul 2025 09:00 AM (IST)

    कामिका एकादशी का व्रत बहुत ही खास माना जाता है। एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। इस बार यह व्रत 21 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन (Kamika Ekadashi 2025) उपवास करने के साथ भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।

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    Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी का महत्व।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

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    कामिका एकादशी में क्या खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Khayein?)

    कामिका एकादशी पर जो साधक उपवास रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही व्रती भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही कुछ सेवन करें। वहीं, भोग को तैयार करते इसके समय सफाई का अच्छी तरह से ध्यान रखें।

    कामिका एकादशी में क्या न खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Nahin Khayein?)

    अगर आप कामिका एकादशी पर व्रत कर रहे हैं, तो अपने खाने का पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। बता दें, व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए।

    इसके साथ ही इस व्रत (Kamika Ekadashi 2025 Significance) पर चावल और नमक का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें।

    भोग चढ़ाने का मंत्र (Kamika Ekadashi 2025 Bhog Mantra)

    कामिका एकादशी पर नारायण को भोग लगाते समय इस मंत्र ''त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।'' का भावपूर्ण जप करें। ऐसा करने से भगवान प्रसाद स्वीकार कर लेते हैं। इसके साथ ही मनचाहा फल प्रदान करते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।