June Pradosh Vrat 2025: जून महीने में कब-कब है प्रदोष व्रत? यहां पता करें शुभ मुहूर्त एवं योग
सनातन धर्म में आषाढ़ महीने (June Pradosh Vrat 2025) का खास महत्व है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव और जगत की देवी मां पार्वती की पूजा एवं भक्ति की जाती है। साथ ही मनचाहा वरदान पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत की महिमा शास्त्रों में निहित है।
धार्मिक मत है कि भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट यथाशीघ्र दूर हो जाते हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा, शिव जी की कृपा से मृत्यु के बाद उच्च लोक में स्थान मिलता है। लेकिन क्या आपको पता है कि जून महीने में कब-कब प्रदोष व्रत है? आइए, प्रदोष व्रत की डेट एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-
यह भी पढ़ें: कब और क्यों मनाई जाती है निर्जला एकादशी, भीमसेन से कैसे जुड़ा है नाता
प्रदोष व्रत 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2025 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, 08 जून को सुबह 07 बजकर 17 मिनट पर ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। वहीं, 09 जून को सुबह 09 बजकर 35 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। इसके लिए 08 जून को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के चलते यह रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 18 मिनट से लेकर 09 बजकर 19 मिनट तक है।
प्रदोष व्रत 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2025 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 जून को देर रात 01 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 23 जून को रात 10 बजकर 09 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इसके लिए 23 जून को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 22 मिनट से लेकर 09 बजकर 23 मिनट तक है। सोमवार के दिन पड़ने के चलते यह सोम प्रदोष व्रत कहलाएगा।
यह भी पढ़ें: यह निर्जला एकादशी लाएगी विशेष कृपा!'भद्रावास' के साथ बन रहे हैं कई मंगलकारी योग, मिलेगा मनचाहा फल
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।