नवरात्र 9 दिन ही क्यों मनाते हैं? महिषासुर वध से लेकर नौ द्वारों तक, जानें इसके पीछे का पौराणिक कारण
नवरात्र 9 दिन ही क्यों मनाई जाती है? जानें महिषासुर वध, 9 रूपों, मानव शरीर के नवद्वार और अंक 9 ...और पढ़ें

नवरात्र 9 दिन मनाने की वजह जानें। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और मां से सुख, शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि नौ दिनों तक ही क्यों मनाई जाती है? इस बारे में एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा बताते हैं, " इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि पौराणिक कथाएं, अंक ज्योतिष और आध्यात्मिक विचार भी हैं।" चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
महिषासुर से युद्ध की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसके अत्याचारों से देवता और मनुष्य परेशान थे। उसे वरदान प्राप्त था, जिसके कारण देवताओं के लिए उसे हराना कठिन हो गया था। तब सभी देवताओं की शक्तियों से मां दुर्गा प्रकट हुईं।
कुछ धार्मिक कथाओं में देवी और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि यह युद्ध नौ दिनों तक चला। मां दुर्गा ने अपने अलग-अलग रूपों और शक्तियों से असुर की सेना का सामना किया। अंत में दसवें दिन महिषासुर का वध हुआ और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई। इसी विजय की याद में नौ दिनों तक नवरात्र और दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है।
अंक 9 को क्यों माना जाता है खास?
न्यूमेरोलॉजी में अंक 9 को विशेष महत्व दिया जाता है। अंक ज्योतिष में इसे पूर्णता, ऊर्जा और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। गणित में भी नौ की एक दिलचस्प विशेषता है। किसी संख्या को नौ से गुणा करने पर प्राप्त उत्तर के अंकों का योग कई बार नौ ही पाया जाता है।
उदाहरण के लिए, 9 को 2 से गुणा करने पर 18 मिलता है। अब 1 और 8 को जोड़ें, तो उत्तर 9 आता है। इसी तरह 9 को 5 से गुणा करने पर 45 मिलता है और 4 तथा 5 का योग भी 9 होता है। इसलिए अंक ज्योतिष में इस अंक को पूर्णता और निरंतरता से जोड़कर देखा जाता है।
शरीर के नौ द्वारों से क्या है संबंध?
धार्मिक ग्रंथों में मानव शरीर को नौ द्वारों वाला नगर भी कहा गया है। सामान्य रूप से इन नौ द्वारों में दो आंखें, दो कान, दो नथुने, मुंह, जननेंद्रिय और गुदा शामिल हैं।
चंद्रेश जी कहते हैं, "इस विचार का उल्लेख भगवद्गीता में भी मिलता है, जहां शरीर को नौ द्वारों वाले नगर के रूप में समझाया गया है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि मनुष्य अपनी इंद्रियों के माध्यम से बाहरी दुनिया से जुड़ता है। नवरात्र के नौ दिनों को आत्मचिंतन, इंद्रियों पर नियंत्रण और मन को शुद्ध करने के अवसर के रूप में देखा जाता है। यह भी एक कारण हो सकता है कि नवरात्र को नौ दिनों तक मनाया जाता है।"
मां दुर्गा के नौ स्वरूप और आध्यात्मिक यात्रा
नवरात्र के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक स्वरूप की पूजा की जाती है। इन नौ स्वरूपों को नवदुर्गा कहा जाता है। इनमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। इन सभी स्वरूपों के अपने अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ हैं। इसलिए भी नवरात्र को नौ दिन तक मनाया जाता है।
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