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शारदीय नवरात्र 2026 कलश स्थापना: पंच पल्लव के बिना अधूरी है पूजा, जानें आम-अशोक के पत्तों का चमत्कारी महत्व

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:55 PM (GMT+05:30)

शारदीय नवरात्र 2026 में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश में रखे जाने वाले पंच पल्लव का क्या अर्थ ...और पढ़ें

शारदीय नवरात्र कलश स्थापना में पंच पल्लव का महत्व । (Picture Credit- AI Generated)

शारदीय नवरात्र कलश स्थापना में पंच पल्लव का महत्व । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा और कलश स्‍थापना का विशेष महत्व होता है। नवरात्र के पहले दिन घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है। इस पूजा में जल से भरा कलश, नारियल, कलावा और पवित्र पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं में पंच पल्लव का भी विशेष स्थान है।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, पंच पल्लव प्रकृति, पंचतत्व और जीवन की समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि पंच पल्लव क्या होते हैं? और कलश स्थापना में आम तथा अशोक के पत्तों का क्या महत्व है।

क्या होते हैं पंच पल्लव?

पंच पल्लव का अर्थ है पांच प्रकार के पवित्र वृक्षों के पत्ते। इन्हें कलश स्थापना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में शुभता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, 'आम, अशोक, पीपल, बरगद और पाकड़ के पत्तों को पंच पल्लव में शामिल किया जाता है।'

कलश स्थापना में आम के पत्तों का महत्व

हिंदू धर्म में आम के पत्तों को मांगलिकता, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान आम के पत्तों को कलश के मुख पर इस तरह रखा जाता है कि वे नारियल के नीचे रहें। ज्योतिषी बृज गौतम के अनुसार, 'आम के हरे पत्ते जीवन में नई ऊर्जा, खुशहाली और उन्नति का संदेश देते हैं। इनका हरा रंग प्रकृति, ताजगी और जीवन की निरंतरता का प्रतीक भी माना जाता है।' नवरात्र में आम के पत्तों का उपयोग मां दुर्गा के स्वागत और घर में शुभ वातावरण बनाने की भावना से किया जाता है।

अशोक के पत्ते क्यों माने जाते हैं शुभ?

अशोक के पत्तों का भी धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान है। मान्यता है कि अशोक का वृक्ष दुखों से मुक्ति, शांति और शुभता का प्रतीक है। संस्कृत में 'अशोक' शब्द का अर्थ शोक से रहित भी बताया जाता है।

इसी वजह से अशोक के पत्तों को पूजा में शामिल करना सुख और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दौरान इनका प्रयोग भक्तों की श्रद्धा और मां दुर्गा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।