11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र, जम्मू में कलश स्थापना के लिए सिर्फ 45 मिनट का मुहूर्त; जानें शुभ समय
Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर रविवार से शुरू होंगे, जिसमें मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। महंत रोहित ...और पढ़ें

नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन का खास संयोग, हाथी पर सवार होकर आएंगी। (फाइल फोटो)
HighLights
शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से होंगे प्रारंभ।
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन का खास संयोग।
मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी।
जागरण संवाददाता, जम्मू। आश्विन शारदीय नवरात्र का पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगा। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन विधिवत् कलश स्थापना तथा अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाएगी।
देवी की साख लगाने, अखंड ज्योति प्रज्वलित करने और कलश स्थापना के लिए रविवार को प्रातः 11:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक अभिजित मुहूर्त रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करने की सलाह दी।
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार, इस वर्ष आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा रविवार को चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग, किंस्तुघ्न करण तथा कन्या राशि के गोचर में प्रारंभ होगी। नवरात्र के नौ दिनों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी।
मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी
उन्होंने बताया कि इस वर्ष नवरात्र का शुभारंभ रविवार को होने के कारण धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। देवीभागवत के अनुसार रविवार और सोमवार को कलश स्थापना होने पर देवी का वाहन हाथी माना जाता है।
ज्योतिषीय परंपरा में हाथी को सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, कृषि और हरियाली के लिए शुभ संकेत माना गया है।
महंत शास्त्री ने श्रद्धालुओं से नवरात्र में सामर्थ्य एवं स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखने, सात्त्विक आहार ग्रहण करने, प्रातः-सायं पूजा-अर्चना एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ करने तथा दान-पुण्य और संयम का पालन करने की अपील की।
नवरात्र आत्मसंयम और मां भगवती की आराधना का विशेष पर्व
उन्होंने कहा कि नवरात्र आत्मसंयम, आध्यात्मिक साधना और मां भगवती की आराधना का विशेष पर्व है। उन्होंने बताया कि वर्ष में चार प्रमुख नवरात्र होते हैं। चैत्र और आश्विन नवरात्र व्यापक रूप से मनाए जाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ शुक्ल पक्ष के नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है, जिनमें विशेष साधना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का विधान है।
