पवित्र स्थलों पर मरने वालों की आत्मा के साथ क्या होता है? जानिए 7 मोक्षदायिनी तीर्थों का रहस्य
गरुड़ पुराण के अनुसार, पवित्र तीर्थ स्थलों पर मृत्यु होने से आत्मा को मोक्ष मिल सकता है, लेकिन इसके लिए ...और पढ़ें

तीर्थ स्थल पर देह त्यागने से क्या होता है?
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गरुड़ पुराण में मोक्षदायिनी सात पवित्र स्थानों का जिक्र।
तीर्थ पर मृत्यु के लिए शुद्ध भाव और उद्देश्य महत्वपूर्ण।
दान, सेवा और अच्छे कर्म भी मोक्ष के मार्ग हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भागदौड़ भरे इस जीवन का अंतिम पड़ाव मृत्यु है, जिसकी माया से कोई अछूता नहीं है। लेकिन जब आपके किसी करीब की मृत्यु पवित्र तीर्थ की चौखट पर, पवित्र नदी के किनारे या किसी प्राचीन मंदिर के प्रांगण में हो जाती है, तो मन में कई तरह के सवाल आते हैं।
पवित्र तीर्थ स्थल पर होने वाली मृत्यु को लेकर हमारे धार्मिक संस्कार और पुरानी पीढ़ियां इसे मोक्ष और सौभाग्य का विषय मानती है, वहीं दूसरी ओर अपनों को अचानक खो देना का डर आपको मानवीय पीड़ा पहुंचता है। तीर्थ स्थलों और पवित्र मंदिरों में मरने वाले लोगों की आत्मों को मोक्ष मिलता है या कर्मों का फल भुगतना पड़ता है, गरुड़ पुराण में साफ-साफ बताया गया है।
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तीर्थ पर मरने वाले लोगों की आत्मा के साथ क्या होता है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब गरुड़ जी ने भगवान विष्णु से पूछा कि मनुष्य किस दान और तीर्थ के प्रभाव से मोक्ष प्राप्त कर सकता है और किन जगहों पर देह त्यागने से आत्मा को पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता है।
इस पर भगवान विष्णु ने बताया कि, पृथ्वी लोक पर कुछ पवित्र स्थान ऐसे हैं, जहां शरीर त्यागने वाले जीव को मोक्ष मिलने की मान्यता है। गरुड़ पुराण में सात ऐसे स्थानों का जिक्र किया गया है, जिसे मोक्षदायिनी के नाम से जाना जाता है। इसमें -
- अयोध्या
- मथुरा
- हरिद्वार
- काशी
- कांची
- अवंतिका (उज्जैन)
- द्वारका
मान्यता है कि, इन पवित्र नगरों में शरीर त्यागने वाले जीव को भगवा विष्णु के लोक की प्राप्ति होती है और फिर उसे पृथ्वी पर दुबारा जन्म नहीं लेना पड़ता है।

गरुड़ पुराण में शालिग्राम और तुलसी का महत्व
गरुड़ पुराण के मुताबिक, जहां कहीं भी शालिग्राम शिला या द्वारवती शिला विराजमान हो, वहां मृत्यु होने पर जीव को मुक्ति मिलती है।
इसके अलावा तुलसी का पौधा लगाना, उसकी सेवा करना, पूजा करना, छूना और उसका गुणगान करना भी पापों का नाश करने वाला माना गया है।
क्या तीर्थ में जाने से पुण्य मिलने की गारंटी है?
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु एक उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि, कुछ मछली पकड़ने वाले मछुआरे रोजाना सुबह नर्मदा नदी के दर्शन करते थे, लेकिन फिर उन्हें शिवलोक की प्राप्ति नहीं हुई। क्योंकि उनका उद्देश्य नदी में भक्ति करना नहीं, बल्कि मछली पकड़ना था।
इसका भाव है कि सिर्फ पवित्र स्थान पर जाना ही काफी नहीं है, मनुष्य का भाव और उद्देश्य भी काफी मायने रखता है।
किन स्थानों पर मरने से स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है?
गरुड़ पुराण में कुछ ऐसे भी पवित्र स्थानों का जिक्र किया गया है, जहां मृत्यु होने से जीव को लंबे समय तक स्वर्ग में रहने का अवसर प्राप्त होता है। लेकिन यहां एक अंतर है ब्रह्मा जी का एक दिन पूरा होने के बाद जीव फिर पृथ्वी पर जन्म लेता है। इन पवित्र स्थान में शामिल है-
- कुरुक्षेत्र
- भृगुक्षेत्र
- प्रभास क्षेत्र
- श्रीशैल
- आबू पर्वत
- पुष्कर
- शिवक्षेत्र
तीर्थ के अलावा कौन-से काम कल्याणकारी हैं?
गरुड़ पुराण में सिर्फ तीर्थ यात्रा का महत्व ही नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों के महत्व पर भी खास बल दिया गया है।
इसमें जरूरतमंद और गरीब ब्राह्मण की सेवा और दान करना
गौशाला और जलाशय को बनवाना
उद्यान और मंदिर बनाना
अनाथ मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करना
जीवन में दान, ध्यान और दया का पालन करना। गरुड़ पुराण में इन कर्मों को बेहद कल्याणकारी माना गया है, जो व्यक्ति को मोक्ष प्रदान करते हैं।
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