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क्या पितृ पक्ष के दौरान मृत्यु होने पर मोक्ष मिलता है? गरुड़ पुराण के इस रहस्य को जरूर समझें

Published: Wed, 07 Oct 2026 10:00 AM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष में मृत्यु होने से मोक्ष नहीं मिलता, बल्कि अच्छे कर्म ही मोक्ष का आधार ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में मृत्यु और मोक्ष का रहस्य गरुड़ पुराण क्या कहता है (Picture Credit: AI Generated)

पितृ पक्ष में मृत्यु और मोक्ष का रहस्य गरुड़ पुराण क्या कहता है (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. गरुड़ पुराण के अनुसार अच्छे कर्म ही मोक्ष का आधार हैं।

  2. पितृ पक्ष में मृत्यु से मोक्ष का सीधा संबंध नहीं।

  3. मृतक का श्राद्ध तीन साल बाद अन्य पूर्वजों संग होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पितरों को समर्पित समय माना जाता है। इस दौरान तर्पण और श्राद्ध करके पूर्वजों को प्रसन्न किया जाता है। इस पूरी अवधि में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए विधि-विधान से श्राद्ध और पिंडदान करते हैं।

ऐसी मान्यता है कि जो लोग इन 16 दिनों में पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं उनके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। कई बार मन में एक सवाल आता है कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु पितृ पक्ष के दौरान हो जाए, तो क्या उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है? मृत्यु के कई रहस्यों के बारे में गरुड़ पुराण में कई बातें लिखी हैं जिसके बारे में जान लेना जरूरी होता है। आइए ऐसे ही एक रहस्य को जानें यहां।

क्या पितृ पक्ष में मृत्यु से खुलते हैं मोक्ष के द्वार?

गरुड़ पुराण में मोक्ष पाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी अच्छे कर्मों को बताया गया है। केवल किसी विशेष तिथि या पक्ष में मृत्यु होने से मोक्ष नहीं मिलता है।

मोक्ष पाने के लिए कर्म, जीवन में किए गए धार्मिक कार्य और भक्ति भी जरूरी होती है। पितृ पक्ष का समय विशेष रूप से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का होता है और उनके निमित्त कर्म करने का अवसर माना जाता है। ऐसा कहना पूरी तरह से सही नहीं कि इस अवधि में मृत्यु होने से ही मोक्ष मिलता है।

पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर श्राद्ध के नियम

  • यदि किसी व्यक्ति को मृत्यु पितृ पक्ष के दौरान होती है, तो उसके अंतिम संस्कार के वही नियम लागू होते हैं, जो अन्य समय में होते हैं।
  • इस दौरान अन्य पूर्वजों के श्राद्ध की मनाही होती है और तीन साल तक घर में कोई भी श्राद्ध कर्म नहीं होते हैं।
  • मृत्यु के बाद मृतक के लिए सभी संस्कार किए जाते हैं जिसमें तेरहवीं संस्कार को प्रमुख माना जाता है।
  • यदि मृत्यु पितृ पक्ष के दौरान हुई है, तो उस व्यक्ति का श्राद्ध सामान्यतः उसकी मृत्यु की तिथि के अनुसार ही तीन साल बाद अन्य पूर्वजों के साथ मिलान के बाद किया जाता है।
  • श्राद्ध में तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज जैसे कर्म किए जाते हैं और अन्य नियमों का पालन भी श्रद्धा से किया जाता है।
  • पितृ पक्ष में मृत्यु होने का मतलब यह नहीं है कि मृत व्यक्ति का श्राद्ध नहीं किया जाएगा, लेकिन मृतक का श्राद्ध उस समय से आरंभ होता है जब उनका अन्य पूर्वजों के साथ मेल हो जाता है।

धार्मिक परंपरा में गरुड़ पुराण को मृत्यु और उसके बाद की अवस्था को समझने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। उसमें बताया गया है कि पितृ पक्ष में किसी व्यक्ति की मृत्यु से मोक्ष का कोई संबंध नहीं है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।