पितृ पक्ष में बच्चे का जन्म! घर में सोबर लगते ही क्या रुक जाता है श्राद्ध? गरुड़ पुराण में लिखा है जवाब
पितृ पक्ष में बच्चे के जन्म पर लगने वाले सोबर के दौरान श्राद्ध कर्म करने या न करने को लेकर गरुड़ पुराण में स्पष्ट नियम बताए गए हैं।

सोबर के बावजूद श्राद्ध कर्म करें या नहीं, जानें गरुड़ पुराण का विधान (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
पितृ पक्ष में बच्चे के जन्म पर सोबर लगता है।
गरुड़ पुराण कहता है श्राद्ध कर्म न रोकें।
पुरुष सदस्य तय तिथि पर श्राद्ध कर सकते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष को लेकर कई ऐसे नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। इन्हीं नियमों में एक एक है पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण करना। इस दौरान विधि-विधान के साथ पूर्वजों के लिए कई कर्म किए जाते हैं जिससे उन्हें मुक्ति मिलती और घर में उनका आशीर्वाद बनी बना रहता है।
इसी कारण से इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। वहीं मन में एक सवाल यह भी आता है कि अगर पितृ पक्ष में किसी के घर में बच्चे का जन्म होता है और सोबर लग जाता है, तो क्या उस दौरान भी पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं? आइए आपको बताते हैं इसके बारे में गरुड़ पुराण में क्या लिखा है और इस अवधि के नियम क्या हैं?
घर में बच्चे के जन्म पर लगता है सोबर
हिंदू धार्मिक परंपराओं में बच्चे के जन्म के कुछ दिनों बाद तक घर में पूजा-पाठ व कोई भी धार्मिक कार्यों को करने से मना किया जाता है।
इस दौरान प्रसूता यानी नई मां को किसी भी तरह की बुरी शक्तियों से बचाने के लिए घर में कई नियमों का पालन भी किया जाता है। वहीं बच्चे के जन्म के समय घर में सोबर मान्य हो जाता है और कम से कम 12 दिनों तक कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किया जाता है।
क्या सोबर लगने पर श्राद्ध कर्म नहीं होते हैं?
जिस तरह से सोबर की अवधि में परिवार के सदस्य धार्मिक अनुष्ठानों से दूरी रखते हैं। ऐसे में घर आप श्राद्ध कर्म नहीं कर सकते हैं और ब्राह्मण भोज भी नहीं किया जा सकता हो, तो आपको घबराने के बजाय हाथ जोड़कर पूर्वजों से क्षमा मांग लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि सर्वपितृ अमावस्या तक सोबर समाप्त हो जाए, तो उस दिन समस्त पूर्वजों के लिए एक साथ श्राद्ध किया जा सकता है।
पितृ पक्ष में सोबर के नियमों के लिए क्या कहता है गरुड़ पुराण?
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यदि पितृ पक्ष के दौरान घर पर बच्चे का जन्म हो जाए और सोबर लग जाए तो आपको श्राद्ध कर्म रोकने नहीं चाहिए।
सोबर के नियम मुख्य रूप से प्रसूता के लिए माने जाते हैं और इसी वजह से घर के पुरुष पूर्वजों का श्राद्ध उनकी तय तिथि पर कर सकते हैं। घर में बच्चे के जन्म के बाद मुख्य रूप से जन्म देने वाली महिला पर ही कई नियम लागू होते हैं और उसे शुद्धि के बाद ही पूजा-पाठ या कोई भी धार्मिक कर्म करने की सलाह दी जाती है।
पितृ पक्ष के दौरान घर में बच्चे के जन्म को अत्यंत शुभ माना जाता है और इन्हें पूर्वजों का आशीर्वाद ही माना जाता है। आप कुछ नियमों के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध कर्म कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद ले सकते हैं।
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