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सर्वपितृ अमावस्या 2026: श्राद्ध का खाना खाने न आए कौवा तो क्या करें? नोट करें विकल्प और पंचबली का नियम

Published: Mon, 05 Oct 2026 06:08 PM (IST)

पितृपक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का बड़ा महत्व है। इस दौरान अगर कौवा श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने न आए तो क्या करें? जानें धार्मिक महत्व और पंचबली की परंपरा।

पितृपक्ष में कैसे करें तर्पण? (AI-Generated Image)

पितृपक्ष में कैसे करें तर्पण? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना गया है

  2. कौवा न आए तो गाय, कुत्ते या चींटियों को भोजन दें

  3. पंचबली में पांच अलग-अलग जीवों को भोजन देना जरूरी है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृपक्ष का सबसे अहम और महत्वपूर्ण दिन अभी बाकी है। सर्वपितृ अमावस्या, 10 अक्टूबर को है और यह दिन तर्पण के लिए बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों श्रद्धापूर्वक पितरों को याद करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। श्राद्ध कर्म के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ-साथ अलग-अलग जीवों के लिए भी भोजन निकाला जाता है।

लेकिन, कई बार लोगों के सामने यह समस्या आती है कि श्राद्ध का खाना बाहर रखने के बाद भी कौवा उसे खाने नहीं आता। ऐसे में मन में यह आशंका उठती है कि कहीं पितर नाराज तो नहीं हैं। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि इस स्थिति में धार्मिक नियमों के अनुसार क्या करना चाहिए।

कौवे को ही भोजन क्यों कराया जाता है?

सनातन परंपरा में कौवे को पितरों का प्रतिनिधि या वाहक माना गया है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि कौवे द्वारा ग्रहण किया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है। इसी वजह से श्राद्ध का अनुष्ठान पूरा होते ही कौवे के लिए भोजन का एक हिस्सा अलग से रखा जाता है।

अगर कौवा न आए तो क्या करें?

अगर श्राद्ध के दिन आसपास कौवा न दिखे या भोजन न खाए, तो घबराने या श्राद्ध को अधूरा मानने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इसके लिए शास्त्रों में बहुत ही आसान से विकल्प बताए गए हैं:

  • हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है। कौवा न मिलने पर श्राद्ध के भोजन का वह हिस्सा गाय को खिला दें।
  • भोजन का अंश कुत्ते को खिलाया जा सकता है या चींटियों के बिल के पास रखा जा सकता है।
  • अगर कोई जीव न मिले, तो उस ग्रास को बहते जल में प्रवाहित कर दें या फिर पीपल के पेड़ की जड़ में रख दें।

क्या है 'पंचबली' की परंपरा?

श्राद्ध विधि में पंचबली का विशेष महत्व है। इसके तहत भोजन बनाते ही पांच अलग-अलग अंश निकाले जाते हैं:

  • देव बलि (देवताओं के लिए)
  • गो बलि (गाय के लिए)
  • स्वान बलि (कुत्ते के लिए)
  • काक बलि (कौवे के लिए)
  • पिपलीकादि बलि (चींटी और अन्य कीट-पतंगों के लिए)

शास्त्रों के अनुसार, अगर ब्राह्मण भोजन पूरी श्रद्धा से कराया जाए और पंचबली के अन्य जीवों को उनका हिस्सा दे दिया जाए, तो श्राद्ध कर्म पूरी तरह सफल और संपन्न माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।