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गया से लेकर बद्रीनाथ तक: पितरों की आत्मा शांति के लिए बेहद खास हैं ये 14 पावन धाम, देखें पूरी लिस्ट

Published: Mon, 28 Sep 2026 05:30 PM (IST)

साल 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्तूबर तक चलेगा। भारत में गया, वाराणसी, प्रयागराज सहित ...और पढ़ें

श्राद्ध कर्म से जुड़े पवित्र तीर्थस्थल

श्राद्ध कर्म से जुड़े पवित्र तीर्थस्थल

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। साल 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर और 10 अक्तूबर 2026, 'सर्वपितृ अमावस्या' के मौके पर इसक समापन होगा। 16 दिनों श्राद्ध पक्ष के दौरान लोग पितरों की मुक्ति औ तृप्त के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म की परंपरा निभाएंगे। हिंदू धार्मिक नियमों के मुताबिक, श्राद्ध कर्म तट, सरोवर, नदी या पवित्र झील के पास करना सबसे शुभ माना जाता है।

भारत में पूर्वजों की आत्मा शांति और पितृ दोष से निवारण के लिए 14 प्रमुख तीर्थ हैं, जो धार्मिक नजरिए से खास होने के साथ पवित्र भी माने जाते हैं। मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान पितरों से संबंधित इन प्रमुख तीर्थ स्थलों पर उनका पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। आइए जानते हैं उन पवित्र तीर्थों के बारे में जहां पितृ दोष शांत करने के लिए श्राद्ध कर्म करना शुभ माना गया है।

गया, बिहार
भारत के बिहार राज्य में स्थित है गया जिला, जो धार्मिक नजरिए से खास होने के साथ पवित्र भी माना गया है। गया में स्थित फल्गु नदी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र नदियों में शामिल किया जाता है। वायु पुराण के मुताबिक, इस नदी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। भारत वर्ष से तीर्थयात्री इस पवित्र स्थान पर दिवगंत आत्माओं का पिंडदान करने के लिए आते हैं। माना जाता है कि, फल्गु नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सांसारिक पाप धुल जाते हैं।

फल्गु नदी के किनारे करीब 48 चबूतरे हैं, जहां ब्राह्मण पंडितों द्वारा पिंडदान करवाया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान गया में पितरों का पिंडदान करने वाले लोगों की काफी भीड़ देखने को मिलती है। इस दौरान भारत वर्ष से लोग गया पहुंचकर पितरों का श्राद्ध कर्म करते हैं।

वाराणसी
हिंदू धर्म ग्रंथों में वाराणसी को काशी के नाम से भी जाना जाता है, जहां भारत की सबसे पवित्र नदी पाई जाती है। दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक वाराणसी शहर है, जो अपनी समृद्धि विरासत, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान काशी में गंगा नदी के किनारे आयोजित होने वाला पिंडदान, दिवंगत आत्माओं और पितरों के लिए धार्मिक अनुष्ठान में शामिल है। पितृ पक्ष के दौरान वाराणसी में भी लोग अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करने के लिए पहुंचते हैं।

प्रयागराज (इलाहाबाद)
उत्तर प्रदेश की प्रयाग नगरी भी भारत की प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जहां हिंदू धर्म के हर अनुयायी को जीवन में कम से कम एक बार जरूर आना चाहिए। त्रिवेणी संगम यानी गंगा, सरस्वती और यमुना नदियों के संगम की वजह इसे भारत के प्रमुख और पवित्र तीर्थ स्थानों में शामिल किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान हिंदू श्रद्धालु पितरों का पिंडदान करने के लिए प्रयागराज आते हैं। इलाहाबाद भारत के उन पवित्र स्थलों में शामिल है, जहां पिंडदान करना शुभ माना जाता है।

हरिद्वार में पिंडदान
उत्तराखंड में स्थित हरिद्वार हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में शामिल है। इसी स्थान से गंगा नदी का प्रवाह शुरू होता है। पितृ पक्ष के दौरान कई श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर अपने पूर्वजों का पिंडदान करते हैं। श्राद्ध कर्म, तर्पण, पिंडदान और पितरों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान के लिए हरिद्वार भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में शामिल है।

अवंतिका में पिंडदान
अवंतिका को भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थानों में शामिल किया जाता है, क्योंकि यहां क्षिप्रा नदी बहती है। मान्यताओं के मुताबिक, क्षिप्रा नदी का बहता हुआ जल दिवंगत आत्माओं के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए प्रमुख स्थल है। यह नदी हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में गिने जाते हैं, जिनका जिक्र वेदों में भी किया गया है। इस जगह को शक्तिभया तीर्थ भी कहा जाता है। पितृ पक्ष के दौरान नदी के किनारे पिंडदान करने का महत्व काफी बढ़ जाता है।

अयोध्या (भरत कुंड)
उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के किनारे स्थित प्राचीन भारतीय शहर अयोध्या, भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। अयोध्या नगरी भी भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थानों में शामिल है, जहां 350 किलोमीटर लंबी सरयू नदी के किनारे बसे राम पैड़ी घाट पर दिवंगत आत्माओं और पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि, इस नदी में स्नान करने से सभी तरह क पाप धुल जाते हैं।

बद्रीनाथ में पिंडदान
उत्तराखंड राज्य में स्थित है बद्रीनाथ जो भारत के पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। भगवान विष्णु का पवित्र निवास होने के साथ हिंदू श्रद्धालुओं के लिए पितृ कर्म अनुष्ठान के लिए भी खास माना जाता है। बद्रीनाथ में स्थित अलकनंदा नदी भारत की सबसे पवित्र नदियों में शामिल है। इस नदी के किनारे प्रसिद्ध ब्रह्म कपाल घाट, जहां हिंदू श्रद्धालु पवित्र स्नान कर सांसारिक पाप से छुटकारा पाते हैं।

द्वारका में पिंडदान
द्वारका नगरी गोमती नदी के किनारे बसा हुआ है। इस नदी के किनारे स्थित है गोमती घाट जो हिंदू अनुयायियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में शामिल है। इस पवित्र स्थान पर बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा द्वारका गोमती नदी के तट पर दिवंगत आत्माओं के लिए पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

जगन्नाथ पुरी में पिंडदान
उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ धाम जो दिवंगत आत्माओं और पूर्वजों के लिए हिंदू अनुष्ठान करने के लिए दो पवित्र नदियों, भार्गवी नदी और महानदी का संगम स्थल है। यह पवित्र स्थल हिंदू तीर्थयात्रियों का गंतव्य है, जो यहां स्नान करके अपने सांसारिक पापों से मुक्ति पाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान दक्षिण भारत के कई श्रद्धालु इस स्थान पर पितरों का श्राद्ध कर्म करने के लिए आते हैं।

कुरुक्षेत्र
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के थानेसर में स्थित है सन्निहित सरोवर, जो हिंदू भक्तों के बीच एक पवित्र जल भंडार के रूप में काफी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि, यह सरोवर सात पवित्र सरस्वती नदियों के संगम का स्थल माना जाता है। इस पवित्र जल में स्नान करने से भटकती आत्माओं को शांति मिलती है। यह पवित्र स्थान दिवंगत आत्माओं के लिए पिंडदान करने के लिए सबसे लोकप्रिय स्थलों में शामिल है। भारत वर्ष से श्रद्धालु अपने दिवंगत रिश्तेदारों और पूर्वजों की आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यहां आते हैं।

मथुरा में पिंडदान
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि होने के नाते मथुरा हिंदू श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां विश्रांति तीर्थ, बोधिनी और वायु तीर्थ ऐसे पवित्र स्थान हैं, जहां हिंदू भक्त साल भर दिवंगत आत्माओं के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आते हैं।

पुष्कर में पिंडदान
राजस्थान के पुष्कर में पुष्कर सरोवर नाम से चर्चित इस झील तक जाने वाले 52 घाट हैं। ये नहाने के चबूतरे और पानी उतरने के लिए बनी सीढ़ियां हैं। पुष्कर सरोवर में भारत वर्ष से श्रद्धालु स्नान करने के लिए आते हैं। माना जाता है कि, इस पवित्र जल में नहाने से पाप धुल जाते हैं। इसके अलावा यहां पर जन्म-पुनर्जन्म के कर्म चक्र से छुटकारा पाने के लिए भी पिंडदान की रस्म निभाई जाती है।

सिद्धपुर में पिंडदान
हिंदू धर्म में दिवंगत आत्माओं की शांति और पूर्वजों को तृप्त करने के लिए दी जाने वाली पिंडदान की रस्म खासतौर से गुजरात राज्य के सिद्धपुर में भी निभाई जाती है। यह शहर भी हिंदू श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है।

उज्जैन में पिंडदान
उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे पिंडदान जैसी हिंदू धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि, शिप्रा नदी के बहते जल में स्नान करने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से छुटकारा मिलता है।

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