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पितृ पक्ष में पिंडदान के लिए सिर्फ गया नहीं, आसपास की ये जगहें भी हैं खास; पढ़ें घाटों की डिटेल और ट्रैवल गाइड

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:30 AM (IST)

हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान का विशेष महत्व है, जिसके लिए गया के अलावा भी कई पवित्र स्थान हैं।

पितृ पक्ष में गया के अलावा पिंडदान के लिए प्रमुख स्थल (Image Source: AI Generated)

पितृ पक्ष में गया के अलावा पिंडदान के लिए प्रमुख स्थल (Image Source: AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में भाद्रपद की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरूआत होती है, जिसमें तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान कराने का खास महत्व बताया गया है। ऐसे में अगर आप पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण के साथ ही पिंडदान कराने की सोच रहे हैं और इसके लिए गया जाने का प्लान कर रहे हैं, तो आज की यह जानकारी आपके काम आने वाली है। 

बता दें कि भारत में गया के अलावा भी कई फेमस जगहें हैं, जो श्राद्ध और पिंडदान के लिए खासतौर से जानी जाती हैं। आइए इन सभी जगहों के महत्व के बारे में बात करें और साथ में यह भी कि इन जगहों पर कैसे पहुंचा जाए। 

कुरुक्षेत्र, हरियाणा 

कुरुक्षेत्र को हमेशा महाभारत से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यहां ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और 48 कोस कुरुक्षेत्र में पिंडदान कराए जाने का भी खास महत्व बताया गया है। 

कैसे पहुंचें? 

यहां पहुंचने के लिए सबसे पहले कुरुक्षेत्र जंक्शन तक जाएं। इसके बाद ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर और 48 कोस कुरुक्षेत्र का रास्ता महज 3-4 किलोमीटर का ही रह जाता है, जिसके लिए बस, ऑटो-रिक्शा या गाड़ी लेना बेहतर विकल्प है। 

काशी, उत्तर प्रदेश 

हिन्दू धर्म में काशी यानी वाराणसी को मोक्ष का द्वार कहा गया है, यही वजह है कि भोलेनाथ की इस नगरी में पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कराया है। यहां पिशाच मोचन कुंड स्थल इसके लिए खास है, जहां पिंडदान के साथ ही त्रिपिंडी श्राद्ध और पूर्वजों से जुड़े अन्य अनुष्ठान भी होते हैं। 

कैसे पहुंचें? 

वाराणसी एयरपोर्ट या वाराणसी रेलवे स्टेशन तक पहुंचकर वहां से अपनी सुविधा के अनुसार टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं। यहां से पिशाच मोचन कुंड की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। 

हरिद्वार, उत्तराखंड 

उत्तराखंड में हरिद्वार एक ऐसा स्थान है, जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान किया जाता है। हरिद्वार में गंगा के किनारे जो नारायणी शिला मंदिर है, वहां आप पिंडदान कराने जा सकते हैं। 

कैसे पहुंचें? 

अगर आप उत्तराखंड में पिंडदान की सोच रहे हैं तो हरिद्वार रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ेगा। यह मार्ग देश के कई बड़े शहरों के सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। वहीं, फ्लाइट से आने के लिए आपको देहरादून आना पड़ेगा। 

उज्जैन, मध्य प्रदेश

महाकाल की नगरी उज्जैन पितृकर्म के लिए खास महत्व रखती है। इस शहर में सिद्धवट, गयाकोठा मंदिर, राम घाट और नृसिंह घाट में पितरों की शांति के लिए पूजा कराई जाती है। 

कैसे पहुंचें? 

ट्रेन से जाना हो तो उज्जैन रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ेगा, जबकि फ्लाइट से जाने पर आपको इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट तक आना होगा। यह उज्जैन से करीब 53 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा, सड़क मार्ग से भी उज्जैन आना एक आसान विकल्प है।