मृत्यु के बाद 49 दिनों तक भटकती है आत्मा? गरुड़ पुराण में बताया गया है हैरान करने वाला सच
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा 49 दिनों तक अपने घर-परिवार के आसपास भटकती है और यमलोक की ...और पढ़ें

गरुड़ पुराण का रहस्य । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्यु जीवन का एक ऐसा सत्य है, जिसे लेकर हर इंसान के मन में कई सवाल होते हैं। मृत्यु के बाद आत्मा कहां जाती है? क्या मृत्यु के बाद भी आत्मा अपने परिवार और घर के आसपास रहती है? यमलोक तक उसकी यात्रा कैसी होती है? गरुड़ पुराण में इन सवालों का विस्तार से वर्णन मिलता है।
खासतौर पर पुराण के प्रेत कल्प में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति और उसकी परलोक यात्रा कैसी होती है। आमतौर पर यही धारणा है कि आत्मा 13 दिनों तक ही अपने घर या उसके आसपास भटकती है।मगर पुराण में मृत्यु के बाद 49 दिनों तक आत्म की भटकने की यात्रा की बात बताई गई है। चलिए जानते हैं कि इस दौरान आत्मा के साथ क्या होता है।
मृत्यु के बाद शुरुआती दिनों का क्या महत्व है?
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद के शुरुआती दिनों को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने स्थूल शरीर को छोड़कर सूक्ष्म अवस्था में एक दीपक की लौ के समान छोटी होकर आगे की यात्रा करती है।
इसी वजह से हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद कई दिनों तक अलग-अलग संस्कार और कर्मकांड किए जाते हैं। पिंडदान, तर्पण और अन्य धार्मिक क्रियाओं को मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति और उसकी आगे की यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया जाता है।
क्या 13 दिनों तक आत्मा घर के पास रहती है?
ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के बाद शुरुआती 13 दिनों तक मृत व्यक्ति की आत्मा अपने परिवार और परिचित स्थानों पर भटकती रहती है। इसी कारण मृत्यु के बाद 10वें, 11वें, 12वें और 13वें दिन किए जाने वाले संस्कारों को विशेष महत्व दिया जाता है। आत्मा देखती हैं कि उसके जाने के बाद, यमलोक की यात्रा को आसान बनाने के लिए उसका परिवार कर्मकांड कर रहा है या नहीं। आत्मा यह भी देखती है कि उसके जाने का दुख और सुख किसे हुआ है।
49 दिनों की यात्रा का क्या है रहस्य?
गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा 49 दिनों तक भटकती रहती है। 13वीं के बाद तुरंत आत्मा की यमलोक यात्रा शुरू नहीं होती है। इसमें अलग-अलग चरण होते हैं, जिनको आत्मा पार करते हुए यमलोक पहुंचती है। गरुड़ पुराण के प्रेतखंड में यमलोक की ओर जाने वाले मार्ग, विभिन्न पड़ावों और वैतरणी नदी जैसे प्रसंगों का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आत्मा को अपने कर्मों के अनुसार इस यात्रा का अनुभव करना पड़ता है।
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