क्या आप जानते हैं मृत्यु के बाद शव के नाक और कान में क्यों लगाई जाती है रुई? गरुड़ पुराण में छिपा इसका गहरा सच
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद शव के नाक और कान में रुई लगाने के पीछे के गहरे रहस्य को ...और पढ़ें
-1791098588386_m.webp)
क्या है शव के नाक-कान में रुई लगाने की असली वजह (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
मृत्यु के बाद आत्मा का शरीर से मोह समाप्त करने हेतु रुई।
नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए नाक-कान में रुई लगाई जाती है।
अंतिम संस्कार का महत्वपूर्ण हिस्सा है नाक-कान में रुई लगाना।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है। इसमें मृत्यु के बाद और अंतिम संस्कार के बारे में विस्तार से बताया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक का विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने से आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
जब व्यक्ति के शरीर से प्राण निकल जाते हैं, तो उसके नाक और कान में रुई लगा दी जाती है। यह जानकर आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर मृतक के नाक और कान में रुई लगाने का क्या कारण है? आइए इस आर्टिकल में आपको गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में छिपे इसके रहस्य के बारे में बताते हैं।
मृतक के नाक और कान में रुई लगाने की वजह
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा का शरीर से मोह पूरी तरह समाप्त नहीं होता है। इसलिए शरीर के खुले मार्गों को बंद करने के लिए नाक और कान में रुई लगा दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसकी एक वजह यह भी मानी जाती है कि मृतक के शरीर पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव न पड़े। इसलिए भी नाक और कान को रुई से बंद कर दिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मृत्यु के बाद नाक और कान को रुई से बंद करना अंतिम संस्कार के कर्मकांड का एक अहम हिस्सा है।
इसके अलावा मृतक के मुंह में तुलसी का पत्ता रखा जाता है। मान्यता है कि मृतक के मुंह में तुलसी का पत्ता रखने से आत्मा को सीधे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
जरूर करें ये काम
- जब घर में किसी की मृत्यु हो जाए तो शव को जमीन पर रखना चाहिए। शव के नीचे कुशा जरूर बिछा लें।
- मृतक का सिर हमेशा दक्षिण दिशा और पैर उत्तर दिशा की तरफ होने चाहिए।
- इसके बाद मृतक के मुंह में गंगाजल की कुछ बूंदें और तुलसी का पत्ता डालना चाहिए। मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से शरीर शुद्ध होता है और आत्मा को यमलोक के मार्ग में कष्टों का सामना नहीं करना पड़ता।
- इसके बाद मृतक के दोनों पैरों के अंगूठों को एक धागे से बांध देना चाहिए।
- मृतक को स्नान कराने के बाद ही अंतिम यात्रा की तैयारी करें।
- एक बात का विशेष ध्यान रखें कि अंतिम संस्कार भूलकर भी सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए।
यह भी पढ़ें- जिनकी कोई संतान नहीं होती, उनका श्राद्ध कौन करता है? गरुड़ पुराण में छिपा है जवाब
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
