गरुड़ पुराण के अनुसार आत्महत्या के बाद क्या होता है? जानें प्रेत खंड का वह रहस्य, जो आपको डरा सकता है
गरुड़ पुराण के प्रेत खंड के अनुसार, आत्महत्या को सबसे बड़ा अपराध माना गया हे। ऐसी आत्मा को कठिन यात्रा ...और पढ़ें

आत्महत्या करने वाले की आत्मा कौन से नरक में जाती है। (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
आत्महत्या को सामान्य मृत्यु से भिन्न माना जाता है।
आत्मा को 7 नरकों से गुजरना पड़ता है, 60,000 वर्ष कष्ट।
आत्महत्या करने वाले को ईश्वर भी माफ नहीं करता।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जीवन को ईश्वर का दिया हुआ अनमोल तोहफा माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखने और सही कर्म करने की सीख दी गई है। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा और कर्मों के फल से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। इसी संदर्भ में आत्महत्या से होने वाली मृत्यु को लेकर भी गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। चलिए जानते हैं कि आत्महत्या करने वाले की आत्मा के साथ क्या होता है।
आत्महत्या को लेकर क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आत्महत्या को सामान्य मृत्यु से अलग माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि व्यक्ति अपने जीवन का स्वाभाविक अंत होने से पहले ही शरीर का त्याग कर देता है। माना जाता है कि ऐसी मृत्यु के बाद आत्मा को अपने कर्मों और अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भटकना पड़ता है।
7 नरकों की यात्रा
गरुड़ पुराण में आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के लिए मृत्यु के बाद बहुत ज्यादा कठिन यात्रा के बारे में बताया गया है। इस पुराण में नरक से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख किया गया है। बताया गया है 7 तरह के नरक होते हैं। आत्महत्या करने वाले को इन सातों नरकों से होकर गुजरना पड़ता है और इसमें बहुत लंबा वक्त उसे लगता है। इसके बाद जाकर उसका किसी योनि में जन्म होता है।
60 हजार वर्ष तक कष्ट की मान्यता
आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की आत्मा को लंबे समय तक कष्ट भोगना पड़ता है और 60,000 वर्षों तक नरक में ही रहना पड़ता है। इस दौरान उसे यातनाएं दी जाती हैं और उसके बाद जब आत्मा अपने कर्मो का फल भुगत चुकी होती है, तब उसका जन्म किसी नीच योनि में ही होता है।
आत्मा के भटकने की मान्यता
आत्महत्या से हुई मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा बहुत कठिन हो जाती है, क्यों हिंदू धर्म में अपनी ही जान लेने को सबसे बड़ा अपराध बताया गया है। ऐसे में इसकी सजा भी बहुत कठिन होती है। अलग-अलग मान्यताओं में ऐसा भी बताया गया है कि आत्मा को अपनी अंतिम इच्छाओं को पूरा करने के लिए वर्षों तक भटकना पड़ता है। आत्मा सब कुछ देख सकती है, इसलिए उसे वो सब होता दिखाई देता है, जो उसे कष्ट पहुंचाता है।
अत: यह कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी परिस्थिति को अंतिम मान लेना सबसे खराब स्थिति है। अपने हाथों अपनी ही जान लेने वाले को ईश्वर भी कभी माफ नहीं करता है।
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