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इच्छाओं के गुलाम या अपने मन के राजा? श्रीकृष्ण से सीखें 'ना' कहने की ताकत

Published: Tue, 03 Nov 2026 07:00 AM (IST)

भगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 64 के अनुसार आत्म-नियंत्रण के महत्व को समझाता है। यह बताता है कि छोटी इच्छाओं ...और पढ़ें

आत्म नियंत्रण के लिए भगवान कृष्ण का अमूल्य ज्ञान (Picture Credits- AI Images)

आत्म नियंत्रण के लिए भगवान कृष्ण का अमूल्य ज्ञान (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. भगवद्गीता श्लोक 64: इंद्रियों पर नियंत्रण से सच्ची शांति।

  2. छोटी इच्छाओं पर नियंत्रण ही सच्ची स्वतंत्रता की कुंजी।

  3. राग और द्वेष दोनों ही इंसान को बांधने वाले कारक।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। एक नौकरीपेशा आदमी ने फूड डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल कम करने का फैसला लिया। लेकिन अगले दिन उसके फोन पर एक नोटिफिकेशन आया जिसमें उसकी पसंदीदा बिरयानी पर 40 फीसदी की छूट का ऑफर था। वह अच्छे से इस पर विचार भी नहीं कर पाया था कि उसने फौरन बिरायनी ऑर्डर कर दी।

जीवन में ऐसे मौके दिखाते हैं असल में इंचार्ज कौन है। भगवद्गीता के चैप्टर 2, श्लोक 64 में कहा गया है कि, जो इंसान दुनिया की चीजों के बीच अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल रखकर, पसंद और नापसंद दोनों से मुक्त होकर जीता है उसे सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होती है।

हर इच्छा को पूरा करना आजादी जैसा लग सकता है, लेकिन ऐसा काफी कम होता है। जो इंसान देर रात का नाश्ता नहीं छोड़ सकता या मैसेज चेक करना बंद नहीं कर सकता उसे बाहरी ताकतें चला रही हैं। असली चॉइस तभी शुरू होती है जब आप न कहना सीख सकें।

कृष्ण बचने के लिए नहीं कहते

इस श्लोक में किसी व्यक्ति की इंद्रियों के विषयों के बीच घूमते हुए दिखाया गया है। किसी को भी गुफा में रहने के नहीं कहा जा रहा है। खाना, फोन और शॉपिंग आज आम जीवन का अहम हिस्से बन चुकी है। सवाल यह है कि क्या ये इंसान की मदद करते हैं या इसका उल्टा प्रभाव दिखाते हैं।

कृष्ण कहते हैं कि राग और द्वेष दोनों ही विभक्त हैं। दोनों ही इंसान को बांध देते हैं। जो एक्सरसाइज से नफरत करता है, वह उतना ही फंसा हुआ है जितना कोई जो गैजेट्स खरीदना बंद नहीं कर सकता है।

इसलिए जीवन में छोटी-छोटी बातों पर कंट्रोल बनाना सीखें। बड़े संकल्प पहले हफ्ते में ही टूट जाते हैं। छोटे इंकार ज्यादा देर तक टिके नहीं रहते हैं। सात दिनों के लिए ऐप डिलीट करें। कोई भी अन्प्लान्ड खरीदारी करने से पहले दस मिनट इंतजार करें। हर बार खरीदारी से पहले अपने आप से सवाल पूछे कि क्या इसके बिना आपका काम चल सकता है?

अर्जुन की इंद्रियां पहले जागीं

युद्ध के मैदान में अर्जुन के शरीर ने उसके दिमाग के सोचने से पहले ही प्रतिक्रिया दे दी। उसके हाथ-पैर कमजोर हो गए और उसके रोंगटे खड़े हो गए।

कृष्ण की शिक्षा ने धीरे-धीरे उन्हें उन प्रतिक्रियाओं पर काबू पाना सिखा दिया। पहले कंट्रोल वापस आया और उसके बाद साफ एक्शन हुआ। भगवद्गीता के चैप्टर 2 श्लोक 64 में सेल्फ-कंट्रोल को सीधे अंदर की शांति से जोड़ता है। जैसे-जैसे कम आवेग दिन को आकार देते हैं, तो स्वतंत्रता बढ़ती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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