कामयाब लोग भगवद्गीता का यह नियम अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं, और आप 'अकेले सब संभालूंगा' के जाल में फंसे हैं
श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें श्लोक के माध्यम से जीवन में टीम वर्क, जिम्मेदारी और आपसी सहयोग के महत्व को समझने में ...और पढ़ें
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मुश्किल समय में सही रणनीति कैसे बनाएं

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हममें से अधिकतर लोग अपनी डे टू डे लाइफ में घर और परिवार की जिम्मेदारी तो निभाते हैं, लेकिन इन सबके बीच एक बात पर गौर नहीं करते हैं कि किसी भी बड़े लक्ष्य (Goal) को हासिल करने के लिए दूसरों का साथ देना भी उतना ही जरूरी है। घर से लेकर ऑफिस तक जब सभी लोग अपनी भूमिका को समझकर एक दूसरों का साथ देते हैं, तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आसान लगने लगती हैं। श्रीमद्भगवद्गीता का 11वां श्लोक हमें जीवन में यही सीख देता है।
महाभारत युद्ध के दौरान कौरवों में सबसे प्रमुख दुर्योधन अपने योद्धाओं को भीष्म पितामह की हर तरफ से रक्षा करने को कहता है। इस प्रसंग से हम समझ सकते हैं कि किसी भी मुश्किल का सामना करने के लिए कुशल रणनीति, जिम्मेदारी और आपसी सहयोग कितना जरूरी है।

ऊपर दिए गए इमेज में श्लोक का असल मतलब है, सभी मोर्चों पर अपनी निश्चित जगह स्थित रहकर आप सभी को भीष्म पितामह की हर ओर रक्षा करनी हैं।
इस श्लोक में दुर्योधन अपने सभी योद्धाओं को भीष्म पितामह की रक्षा करने का आदेश देता है। इस प्रसंग से हमें जीवन में अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेने की शिक्षा मिलती है। हर परिवार में प्रत्येक सदस्य की अपनी खास भूमिका होती है और वहीं ऑफिस में प्रत्येक इंसान का काम सिर्फ उसके लक्ष्य से ही नहीं बल्कि पूरी टीम के लक्ष्य से जुड़ा होता है। ऐसे में कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करता है, तो उसका असर दूसरों पर भी देखने को मिल सकता है। इसलिए काम छोटा हो या बड़ा उसे पूरी ईमानदारी से करना चाहिए।
एकजुटता से मुश्किलें होंगी आसान
जीवन में हर चुनौती का सामना करना आसान नहीं होता है। कई बार परिवार, दोस्तों या साथ काम करने वाले लोग हमें मुश्किल समय में साथ देते हैं। गीता के इस श्लोक में दुर्योधन द्वारा सभी योद्धाओं को मिलकर भीष्म पितामह की रक्षा करने का आदेश दिया गया था।
इससे यह सीख मिलती है कि जब लोग एक-दूसरे की भूमिका का सम्मान करते हैं और मिलकर किसी काम को करते हैं तो काम करने की उद्देश्य क्षमता बढ़ जाती है। हालांकि एकता का अर्थ हर बात पर सहमत होना भी नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की बातों को सुनकर अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है।
कठिन समय में सही फैसले लें
जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ मेहनत करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि इस बात को समझना भी जरूरी है कि किस समय क्या करना चाहिए? 11वें श्लोक के मुताबिक दुर्योधन अपने योद्धाओं को अलग-अलग मोर्चों पर उनकी जगह संभालने और भीष्म पितामह की रक्षा करने का आदेश देता है।
इससे योजन बनाकर काम करने के महत्व को समझा जा सकता है। ऑफिस या परिवार में जब कोई बड़ी चुनौती आती है, तो जिम्मेदारियों को बांटना और पहले से तैयारी करना काम को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद करता है।
किसी भी एक व्यक्ति पर जिम्मेदारी छोड़ना गलत
किसी भी टीम में जानकर और अनुभवी लोगों का योगदान मायने रखता है, लेकिन पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सहयोग करने भी उतना ही जरूरी है।
रोजाना के जीवन में किसी भी एक व्यक्ति पर सारी जिम्मेदारी डालने के बजाय काम को मिलकर करना बेहद जरूरी माना गया है। इससे जिम्मेदारी का संतुलन बना रहता है।
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