कोई बार-बार कर रहा है आपका अपमान? भगवद्गीता का यह श्लोक सिखाएगा कैसे उठाएं सही कदम
जब कोई बार-बार आपका अपमान करे, तो क्रोधित होने के बजाय श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक की सीख अपनाएं। यह श्लोक बताता ...और पढ़ें
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बार-बार अपमान होने पर क्या करें भगवद्गीता से जानें सही तरीका (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
भगवद्गीता का श्लोक 2.63 क्रोध के दुष्परिणाम बताता है।
अपमान होने पर तुरंत क्रोधित होने से बचें, शांत रहें।
स्पष्ट संवाद करें या सम्मानपूर्वक उचित दूरी बनाएँ।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जब हम सही और गलत की पहचान नहीं कर पाते हैं। यही नहीं कई बार आप किसी स्थान पर सही निर्णय भी नहीं ले पाते हैं। चाहे वर्कप्लेस हो या रिश्ते आपके सामने ऐसी कई परिस्थितियां आती हैं जिनमे आप ये सोच नहीं पाते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
ऐसे ही कई बार आपके सामने अपमान की स्थिति भी आती है और कोई बार-बार आपका अपमान करता है। इस स्थिति में हम यह अनुमान नहीं लगा पाते हैं कि ऐसे व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए और उसे किस तरह का जवाब देना चाहिए। कभी यह व्यवहार ऑफिस में देखने को मिलता है, तो कभी परिवार या रिश्तों में। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को बहुत क्रोध आ सकता है।
ऐसे समय में श्रीमद्भगवद्गीता की एक सीख हमें अपने मन पर नियंत्रण रखने और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही एक श्लोक के बारे में।
भगवद्गीता का श्लोक देता है यह सीख
श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे अध्याय के 63वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि क्रोध किस तरह मनुष्य की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। उसी तरह से जब आपका कोई अपमान कर रहा हो, तो क्रोध आना एक आम बात है, लेकिन आपको ऐसी स्थिति पर काबू रखना चाहिए।
गीता का श्लोक-
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
श्लोक का अर्थ: क्रोध से मोह अर्थात विवेक में भ्रम पैदा होता है। भ्रम के कारण व्यक्ति की स्मरण शक्ति प्रभावित होती है, स्मरण शक्ति के प्रभावित होने से बुद्धि का नाश होता है और बुद्धि का नाश होने पर व्यक्ति का पतन हो जाता है।
श्लोक में श्री कृष्ण क्या बताते हैं?
इस श्लोक के माध्यम से श्रीकृष्ण बताते हैं कि गुस्से में व्यक्ति कई बार सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पाता है। इसलिए किसी के अपमान करने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत मन से परिस्थिति को समझना जरूरी होता है। अगर आप अपमान का बदला क्रोध में आकर लेते हैं, तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं।
बार-बार अपमान होने पर क्या करना चाहिए?
- अगर कोई आपको बार-बार अपमानित करता है, तो तुरंत पलटकर जवाब देने के बजाय उसके बारे में चिंतन करें। पहले खुद को शांत करें और फिर तय करें कि स्थिति में किस तरह की प्रतिक्रिया देना उचित होगा।
- शांत रहने का अर्थ यह नहीं है कि आप हर बार अपमान सहते रहें। अगर कोई बार-बार आपके साथ गलत व्यवहार कर रहा है, तो उसे स्पष्ट शब्दों में बताएं कि उसका व्यवहार आपको स्वीकार्य नहीं है।
- यदि समझाने के बाद भी कोई व्यक्ति बार-बार अपमान करता है, तो उससे उचित दूरी बनाना या बातचीत सीमित करना ही ठीक है।
जब कोई बार-बार आपका अपमान करे, तो आप क्रोध में आकर कोई गलत कदम निर्णय न लें और न ही चुप रहने को अपनी आदत बनाएं। ऐसी स्थिति में धैर्य, विवेक और आत्मसम्मान के साथ सही निर्णय लें।
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