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महाभारत से जुड़ा है शिव जी के पशुपतिनाथ कहलाने का रहस्य, पढ़ें ये पौराणिक कथा

Published: Tue, 30 Dec 2025 01:30 PM (IST)

भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी ऐसे कई मंदिर स्थापित हैं, जिनका संबंध पौराणिक काल से माना जाता है। ...और पढ़ें

अद्भुत है भगवान शिव के पशुपतिनाथ कहलाने की कथा

अद्भुत है भगवान शिव के पशुपतिनाथ कहलाने की कथा

HighLights

  1. नेपाल में बागमती नदी के किनारे स्थित है पशुपतिनाथ मंदिर

  2. पशुपतिनाथ के दर्शन के बिना अधूरी है केदारनाथ यात्रा

  3. महाभारत में मिलती है पशुपतिनाथ से संबंधित कथा

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज हम बात कर रहे हैं नेपाल में बागमती नदी के किनारे पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर की। इस मंदिर के दर्शन के बिना केदारनाथ मंदिर की यात्रा अधूरी मानी जाती है। इस मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर इस मंदिर को पशुपतिनाथ मंदिर क्यों कहा जाता है।

इसलिए केदारनाथ से माना गया है संबंध

महाभारत में वर्णित पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध में पांडवों द्वारा किए गए नरसंहार से भगवान शिव उनसे बेहद क्रोधित थे। जब पांडवों ने युद्ध के पापों से मुक्ति के लिए भगवान शिव की खोज की, तो शिव जी ने केदारनाथ में एक महिष अर्थात भैंसे का रूप धारण कर लिया और जमीन के अंदर छिप गए। लेकिन भीम ने उन्हें ढूंढ लिया और पीछे से पकड़ कर बाहर खींचने लगे।

लेकिन तब भगवान शिव का सिर पशुपतिनाथ में उत्पन्न हुआ, जहां आज पशुपतिनाथ मंदिर स्थापित है। वहीं शरीर के अन्य हिस्सा केदारनाथ और अन्य पंच केदार स्थलों पर विभाजित हो गए। इसलिए यह माना जाता है कि केदारनाथ में भगवान शिव के शरीर, व पशुपतिनाथ में उनके 'मुख' के दर्शन होते हैं।

Pashupatinath story ग(AI Generated Image)

इसलिए कहलाते हैं पशुपतिनाथ

एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार शिव जी एक हिरण रूप में हिमालय की एक गुफा में रहने लगे। उधर माता पार्वती समेत अन्य देवी-देवता भी महादेव की खोज करने लगे। तब उन्होंने पाया कि शिव जी एक पशु के रूप में हिमालय की एक गुफा में रह रहे हैं। तब सभी ने मिलकर महादेव से यह अनुरोध किया कि वह अपने वास्तविक रूप में आएं और समस्त प्राणियों के स्वामी बनें। भगवान शिव इस प्रार्थना से प्रसन्न हुए और उन्होंने स्वयं को पशुपतिनाथ के रूप में प्रकट किया।

यह कथा भी है प्रचलित

भगवान शिव के पशुपतिनाथ कहलाने के पीछे एक और पौराणिक कथा मिलती है, जिसके अनुसार, इस क्षेत्र में कई राक्षसों ने अपना आतंक फैलाया हुआ था, जिस कारण मनुष्य से लेकर पशु तक उनसे परेशान थे। तब सभी प्राणी महादेव से सहायता मांगने पहुंचते हैं। भगवान शिव ने सभी राक्षसों का संहार किया। महादेव ने 'सभी जीवों के रक्षक' की भूमिका निभाई, इसलिए इस स्थान पर शिव जी को पशुपतिनाथ के रूप में जाना गया।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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