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नई दिल्ली, जेएनएन। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ सबसे ऊंचाई पर स्थित है, यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है। भगवान शिव के यहां पर विराजमान होने की भी एक रोचक कथा है, जो भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण से जुड़ी है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिमालय के केदार श्रृंग पर नर-नारायण तपस्या कर रहे थे, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उनको दर्शन दिए। उन दोनों ने भगवान शिव से केदार श्रृंग पर बसने का निवेदन किया, जिस पर भगवान शिव वहीं पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान हो गए।

केदारनाथ से जुड़ी दूसरी कथा

पांडव महाभारत के युद्ध में अपने सगे-संबंधियों की हत्या के पाप से मुक्त होना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए काशी पहुंचे, लेकिन उनसे नाराज भगवान शिव केदार आ गए। पांडव उनको खोजते हुए केदार तक पहुंच गए, इस पर महादेव बैल का रूप लेकर पशुओं में शामिल हो गए। पांडवों को इस बात का भान हो गया तो भीम ने विकाराल रूप धारण कर दो पहाड़ों पर अपने पैर फैला दिए।

सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से चले गए लेकिन भोलेनाथ नहीं गए। बैल रूपी भगवान शिव भूमि में अंतर्ध्यान होने लगे तभी भीम उन पर झपट पड़े और पीठ को पकड़ लिया। पांडवों की इच्छाशक्ति और भक्ति देखर भोलेनाथ प्रसन्न हो गए और पांडवों को दर्शन दिए। भगवान शिव के दर्शन से पांडव पापमुक्त हो गए। तभी से बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में भगवान केदारनाथ की पूजा होती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बैलरूपी भगवान शिव जब अंतर्ध्यान हुए तो उनके धड़ से आगे का हिस्सा काठमाण्डू में प्रकट हुआ, जिससे वे पशुपतिनाथ कहलाए। भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इस वजह से केदारनाथ समेत इन पांच जगहों को पंचकेदार कहा जाता है।

केदारनाथ मंदिर से जुड़ी रोचक बातें

1. इस मंदिर के कपाट सर्दियों में बंद रहते हैं क्योंकि भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बर्फ से ढक जाता है। केदारनाथ के दर्शनों के लिए बैशाखी बाद गर्मियों में इस मंदिर को खोला जाता है। इस बार इस मंदिर के कपाट 9 मई को खोले गए हैं और ये कपाट 29 अक्टूबर को बंद हो सकते हैं।

2. दीपावली के बाद पड़वा के दिन जब मंदिर के द्वार बंद होते है, तो उस मंदिर में एक दीपक जला देते हैं। 6 माह बाद जब मई में पुजारी वापस केदारनाथ लौटते हैं तो वह दीपक उनको जलता हुआ मिलता है।

3. आश्चर्य की बात तो यह है कि मंदिर को जब खोला जाता है तो उसमें वैसी ही साफ सफाई रहती है, जब उसे बंद करने के समय की गई रहती है।

4. केदारनाथ के कपाट जब बंद होते हैं तो पुजारी भगवान शिव के विग्रह एवं दंडी को 6 माह तक पहाड़ से नीचे ऊखीमठ में ले जाते हैं और वहीं उनकी पूजा करते हैं। 6 माह बाद फिर उन्हें वापस लाते हैं।

5. केदारनाथ मंदिर सुबह 4 बजे से ही खुल जाता है लेकिन भोलेनाथ के दर्शन सुबह 6 बजे से ही होता है। दोपहर में 3 से 5 बजे तक कपाट बंद करते हैं, उस दौरान विशेष पूजा होती है। शाम को 7.30 बजे से 8.30 बजे तक आरती होती है, इससे पहले भगवान पंचमुखी केदारनाथ का विशेष श्रृंगार होता है। 

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Posted By: kartikey.tiwari

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