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4 महीने बाद जागेंगे श्री हरि, देवउठनी एकादशी पर बन रहा 'रवि योग' का महासंयोग, नोट करें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Published: Mon, 02 Nov 2026 10:00 AM (IST)

कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2026) 20 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी, जब भगवान विष्णु अपनी चार ...और पढ़ें

चातुर्मास का कब होगा समापन? (Picture Credits- AI Images)

चातुर्मास का कब होगा समापन? (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2026) मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इसी दिन चातुर्मास (Chaturmas 2026) का समापन होता है। चातुर्मास के खत्म होने के बाद विवाह और अन्य सभी मांगलिक कार्य शुरू होते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को शुभ परिणाम मिलते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रही है। इस व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि देवउठनी एकादशी की सही डेट, शुभ मुहूर्त और पारण समय के बारे में।

देवउठनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Dev Uthani Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत: 20 नवंबर को सुबह 07 बजकर 15 मिनट पर
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन: 21 नवंबर को सुबह 06 बजकर 31 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी का व्रत 20 नवंबर को किया जाएगा।

देवउठनी एकादशी व्रत 2026 पारण टाइम (Dev Uthani Ekadashi Vrat 2026 Paran Time)

धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण शुभ मुहूर्त में करने से पूर्ण फल प्राप्त होता है और श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है। 21 नवंबर को एकादशी व्रत पारण करने का समय दोपहर 01 बजकर 10 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत खोल सकते हैं।

अन्य शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 01 मिनट से 05 बजकर 44 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से 02 बजकर 35 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक
रवि योग:  पूरे दिन

नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त

ज्योतिष गणना के अनुसार, 21, 24, 25 और 26 नवंबर को विवाह का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसा माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में विवाह करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

कब से कब तक रहता है चातुर्मास?

हिंदू पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ महीने की देवशयनी एकादशी से होता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। वहीं, इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर होता है। इसी दिन चातुर्मास समापन होता और शुभ एवं मांगलिक काम शुरू हो जाते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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