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Punjab News: खडूर साहिब लोकसभा सीट से अकाली दल ने उतारा उम्मीदवार, सुखबीर बादल ने इन पर जताया भरोसा

विरसा सिंह वल्टोहा श्री खडूर साहिब ( Khadur Sahib Lok Sabha seat) से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार होंगे। पार्टी ने अपने एक्स एकाउंट पर इसकी जानकारी दी है। बता दें इस घोषणा के साथ ही शिअद पार्टी ने पंजाब और चंडीगढ़ की सभी 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव विरसा सिंह को पार्टी का अध्यक्ष भी बनाया गया।

By Jagran News Edited By: Monu Kumar Jha Published: Sun, 28 Apr 2024 12:39 PM (IST)Updated: Sun, 28 Apr 2024 02:47 PM (IST)
Punjab News: खडूर साहिब लोकसभा सीट से अकाली दल ने उतारे उम्मीदवार।

धर्मवीर सिंह मल्हार, तरनतारन। (Punjab Lok Sabha Election 2024 Hindi  News) संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब से आम आदमी पार्टी और भाजपा द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा के बावजूद शिअद द्वारा फैसला लेने में लगातार देरी की जा रही थी। कारण कोई और नहीं बल्कि खडूर साहिब क्षेत्र से संबंधित अकाली दल का वोट बैंक खिसकने का डर था, क्योंकि वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी के मुखी अमृतपाल सिंह द्वारा आजाद तौर पर खडूर साहिब से चुनाव लड़ने का फैसला लिया गया।

लंबी चर्चा के बाद पूर्व विधायक विरसा पर जताया भरोसा

जिसके चलते शिअद पर दबाव था कि अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को समर्थन दिया जाए। ऐसे में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा लंबी विचार चर्चा की गई। नतीजा यह सामने आया कि रविवार को शिअद के प्रवक्ता व पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा (Virsa Singh Valtoha) के नाम पर सहमति बनी। वल्टोहा के नाम की घोषणा के बाद अकाली दल में जहां खुशी का माहौल है वहीं पार्टी में उम्मीद जगी है कि अब अकाली दल का वोट बैंक टूटेगा नहीं।

वल्टोहा की बादल परिवार के साथ बेहद गहरी नजदीकियां

खेती बाड़ी से संबंधित सोहन सिंह के घर पैदा हुए विरसा सिंह वल्टोहा की आयु साठ वर्ष है। वर्ष 1997 में गठबंधन की सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा विरसा सिंह वल्टोहा को पंजाब सर्विस सेलेक्शन बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया था। इसके बाद वल्टोहा की बादल परिवार के साथ नजदीकियां लगातार बढती रहीं।

2007 में विस हलका वल्टोहा से विरसा सिंह वल्टोहा को शिअद की ओर से टिकट दी गई। इस चुनाव में वल्टोहा ने कांग्रेस के तीन बार मंत्री नहीं गुरचेत सिंह भुल्लर को 11350 मतों से पराजित किया अकाली दल की सरकार में सीपीएस बने। नई हलकाबंदी के दौरान विस हलका वल्टोहा की जगह विस हलका खेमकरण बन गया।

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2012 के चुनाव में शिअद द्वारा वल्टोहा को दूसरी बार शिअद (SAD News) की ओर से चुनाव में उतारा गया तो पूर्व मंत्री गुरचेत सिंह भुल्लर को 13102 मतों से पराजित किया। वल्टोहा दूसरी बार सीपीएस बने। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ वल्टोहा के अच्छे संबंध रहे। जिस दौरान 2017 के चुनाव मौके वल्टोहा को तीसरी बार शिअद की ओर से चुनाव मैदान में उतारा गया।

वल्टोहा 19602 मतों से कांग्रेस के सुखपाल सिंह भुल्लर से हारे

परंतु वल्टोहा 19602 मतों से कांग्रेस के सुखपाल सिंह भुल्लर से हार गए। विरसा सिंह वल्टोहा की शिअद में लगातार बढ़त कायम रही जिसके चलते 2022 के विस चुनाव मौके कैरों परिवार ने खेमकरण हलके की सीट पर दावा ठोंकते चुनाव प्रचार कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों जो तीन बार गठबंधन की सरकार में मंत्री रह चुके थे ने खेमकरण हलके में अपने परिवार के सदस्य को चुनाव लड़वाने की घोषणा कर दी व प्रचार भी शुरू कर दिया।

इस दौरान विरसा सिंह वल्टोहा ने खेमकरण में रैली करवाइ्र, जिसमें सुखबीर सिंह बादल ने पहुंचकर विरसा सिंह वल्टोहा को पार्टी प्रत्याशी घोषित करते हुए कैरों परिवार के दावे को खारिज कर दिया। चुनाव नतीजे में आम आदमी पार्टी की ओर से उतरे सरवन सिंह धुन के हाथों विरसा वल्टोहा 11882 मतों से चुनाव हार गए।

2011 से पार्टी के प्रवक्ता व कोर कमेटी के सदस्य की निभा रहे भूमिका

वल्टोहा शिरोमणि अकाली दल तरनतारन के दो बार अध्यक्ष रहे व 2011 से पार्टी के प्रवक्ता व कोर कमेटी के सदस्य की भूमिका भी निभा रहे हैं। पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की गुड बुक में आने वाले विरसा सिंह वल्टोहा तेज तर्रार नेता माने जाते हैं। संसदीय चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी द्वारा कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को चुनाव मैदान में उतारा गया, जबकि भाजपा द्वारा मनजीत सिंह मियांविंड को चुनाव मैदान में उतारा गया।

इस दौरान अकाली दल अपने प्रत्याशी की घोषणा से पहले लगातार तीन सर्वे करवाकर अच्छे प्रत्याशी को मैदान में उतारना चाहता था। हालांकि बिक्रम सिंह मजीठिया को चुनाव मैदान में उतारने की चर्चा हुई, परंतु मजीठिया ने लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। एसजीीसी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने भी लोस चुनाव से हाथ खींच लिए।

अमृतपाल सिंह खडूर साहिब से इंडीपेंडेंट उम्मीदवार के तौर पर उतरा

बाद में पूर्व मंत्री सुचचा सिंह छोटेपुर के नाम पर भी अकाली दल द्वारा सर्वे करवाया गया, परंतु बाहरी हलके का टैग सुच्चा सिंह छोटेपुर के नाम पर लग रहा था। ऐसे में सुच्चा सिंह के नाम पर सहमति नहीं बन पाई। वारिस पंजाब जत्थेबंदी के मुखी अमृतपाल सिंह द्वारा डिब्रूगढ़ जेल से ही लोकसभा हलका खडूर साहिब से आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला लिया गया तो शिअद सकते में आ गया।

अकाली दल के एक गुट द्वारा सुखबीर सिंह बादल पर यह दबाव बनाने का प्रयास किया गया कि खडूर साहिब संसदीय सीट से शिअद प्रत्याशी उतारने की बजाय अमृतपाल सिंह को समर्थन दें, परंतु अकाली दल की कोर कमेटी ने बेठकें कीं।

जिसमेूं यह बात सामने आई कि यदि शिअद ने अपना पार्टी खडूर साहिब से नहीं उतारा तो अकाली दल का वोट बैंक बंट सकता है। ऐसे में सुखबीर सिंह बादल ने विरसा सिंह वल्टोहा के नाम पर मोहर लगाते हुए उन्हें प्रत्याशी बना दिया।

विरसा सिंह वल्टोहा को प्रत्याशी बनाए जाने पर पूर्व सीपीएस हरमीत सिंह संधू, पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा, शिअद नेता दलबीर सिंह जहांगीर, रमनदीप सिंह भरोवाल, कुलदीप सिंह औलख, कुलदीप सिंह लाहौरिया ,भूपिंदर सिंह खेड़ा, मनोज कुमार टिम्मा, गुरविंदर सिंह रटौल, सर्बजीत सिंह लाली, यादविंदर सिंह जादू, सर्बजीत सिंह भुल्लर, कंवलजीत सिंह मुरादपुरा, जसबीर सिंह मिंटू, गौरवजीत सिंह वल्टोहा, रंजीत सिंह नारली, गुरमान सिंह सिधवा ने शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया का धन्यवाद किया है।

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