तरनतारन, [धर्मबीर सिंह मल्हार]। जिले के गांव कैरों में कुख्‍यात ड्रग तस्‍कर ब्रिज लाल और उसके परिवार के तीन सदस्‍योंं व नौकरी की हत्‍या केे मामले में छह साल की बच्‍ची ने दिल दहला देने वाला खुलासा किया है। बच्‍ची ने कहा कि हमलावरों के साथ छोटा चाचा भी था। वह कह रहा था कि बच्‍चों का कोई कसूर नहीं, इनको छोड़ दो। वारदात के समय घर में चार बच्चे (ब्रिज लाल की तीन पोतियां और एक पोता) भी मौजूद थे। हमलावरों ने उन्हें कुछ नहीं कहा। बच्चों ने सारी रात शवों के साथ सो कर गुजारी।

सुबह करीब सवा छह बजे ब्रिज लाल की छह साल की पोती परी रोते हुए पड़ोसी निशान सिंह के घर गई और घटना की सारी कहानी बताई। उसने बताया कि चाचा गुरजंट सिंह जंटा भी हमलावरों के साथ था। सभी नकाबपोश थे। पहले इन्होंने दादा और फिर चाचा काट दिया। साथ वाले कमरे में जाकर मम्मी को भी मार दिया। जब शोर मचा तो चाचा जंटा ने कहा कि बच्चों को कुछ नहीं होना चाहिए। इनका कोई कसूर नहीं है। अपनी आंखों के सामने पांच लोगों की हत्याएं देखने वाली छह वर्षीय परी की जुबान भले ही डरकर लडख़ड़ा रही थी लेकिन वह बार-बार इस बात को दोहरा रही थी, उसने चाचा जंटा को पहचान लिया था।

चाचू जंटा ने केहा बच्चेयां दा कसूर नहीं, एहना नूं छड्ड देयो बाकियां नूं बड्ड देयो

छह साल की परी ने रोते हुए और लड़खड़ाती आवाज में कहा- मुंह बन्न के आए बंदेआं ने पैहलां दादू नूं मारेआ ते फेर चाचू नूं वी वड्ड सुट्टेआ। नाल वाले कमरेआं विच्च मम्मी अते ताई नूं वी मार दित्ता। जदों रौला पै रेहा सी तां चाचू जंटा ऐह आख रेहा सी कि ऐनां बच्चेआं नूं कुझ न होवे, ऐनां दा कोई कसूर नहीं है। (चेहरा ढक कर आए लोगाें ने पहले दादा को मारा, फिर चाचा को भी बहुत पीटा। बगल वाले कमरे में मम्‍मी थेी, उसे भी मार डाला। जब हंगामा हो रहा था तो जंटा चाचू  कह रहा था कि इन बच्‍चों को कुछ नहीं होना चाहिए, इनका कोई कुसूर नहीं है।)

अपनी आंखों के सामने एक एक बाद एक पांच लोगों की हत्याएं देखने वाली छह वर्षीय परी की जुबान भले ही डरकर लडख़ड़ा रही थी और आंखों में पानी था लेकिन वह बार-बार इस बात को दोहरा रही थी, मैैं चाचू जंटे नूं पछाण लेया सी। (मैं ने चाचू जंटा को पहचान लिया था।)

मासूम बच्ची जब यह बता रही थी सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। इस मासूम ने पड़ोसी निशान सिंह के घर जाकर उनके घर में हुए खूनी खेल का सारा मंजर बयान कर दिया। मासूम ने बताया कि वह सारी रात कैसे अपनी छोटी बहन सुमित और भाई अमरदीप के साथ शवों के साथ ही लेट जाती थी, जबकि दस माह की मासूम सोफिया तो इस सारे घटनाक्रम से ही अनजान है। सोफिया अपनी मां जसप्रीत कौर जस्सी के साथ बेड पर सो रही थी। आशंका जताई जा रही है कि मां को उससे अलग कर हत्या की गई होगी या जसप्रीत ने आरोपितों का मुकाबला करने का प्रयास किया होगा, लेकिन उसे बेड से घसीटकर सोफे और टेबल के बीच जमीन पर पटक दिया गया होगा। क्योंकि उसका शव वहीं मिला था।

पुलिस जांच के अनुसार पांच लोगों की हत्या करने के बाद हमलावरों ने नगदी और जेवरात भी लूटे। वीरवार सुबह घटना की जानकारी मिलते जब सरपंच रंजीत सिंह राणा, पंच हरजीत सिंह, कुलदीप सिंह मौके पर पहुंचे तो लहूलुहान पड़े शवों को देखकर उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। इस घटना के बाद शव पड़े रहे लेकिन उनकी मौत पर आंसू बहाने वाला कोई नहीं था। दोपहर करीब एक बजे के ब्रिज लाल की पुत्रवधुओं के मायके वाले यहां पहुंचे। उनके पहुंचते ही मोहल्ले के लोग वहां से चले गए। लोग दबी जुबान में यह कहते भी सुनाई दिए कि अब नशा नहीं बिकेगा।

ब्रिज की मां भी करती थी तस्करी

गांव को लोगों के अनुसार साल 1997 में अवैध शराब का कारोबार करने वाले ब्रिज लाल धत्तू की मां भी अपने जमाने में अवैध शराब का कारोबार करती थी। ब्रिज के पास जमीन नहीं थी, इसलिए उसने नशे के कारोबार को इतना फैला दिया कि अपनी पत्नी और चारों पुत्रों को भी तस्करी में लगा दिया। परिवार के सदस्यों के खिलाफ कुल 49 मामले दर्ज है।

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जेल में हुई पत्नी की मौत, फिर घर में बढ़ गया विवाद 

ब्रिज की पत्नी रंजीत कौर के खिलाफ 2014 में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज हुआ था। जिसमें चार माह पहले ही उसे दस वर्ष की सजा सुना दी गई थी। अमृतसर की जेल में सजा काट रहा रंजीत कौर की 22 मई को मौत हो गई। रंजीत कौर की मौत के बाद घर में क्लेश बढ़ गया था। नशे के कारोबार से होने वाली आमदनी को आपस में बांटने लिए अकसर घर में विवाद होता था। विवाद से तंग आकर कुछ दिन पहले ही ब्रिज लाल ने अपनी लाइसेंसी राइफल गन हाउस में जमा करवा दी थी।

ग्रामीण नहीं रखते थे परिवार से संबंध

गांव के लोगों ने बताया कि ब्रिज के परिवार के साथ गांव के लोग संबंध नहीं रखते थे। तंग गली में ब्रिज लाल ने अपनी आलीशान कोठी बना रखी थी। कोठी की दीवारें इतनी ऊंची थी कि नशे के धंधे की बाहर वालों को खबर नहीं होती थी। कोठी के पास हवेली में ब्रिज लाल अपने शौक पूरे करता था। उसने कुत्ते, कबूतर, घोड़े इत्यादि रखे हुए थे।

पुलिस ने दर्ज किए बेटी और पुत्रों के बयान

एक साथ पांच हत्याओं के बाद नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती ब्रिज लाल के बड़े पुत्रों बख्शीश सिंह सोना और परमजीत सिंह पम्मा को भी तुरंत घर लाया गया। जबकि अमृतसर में विवाहित ब्रिज की बेटी सरबजीत कौर गांव पहुंची। पुलिस ने तीनों के ब्यान भी दर्ज किए हैैं। पहले तीनों को अलग-अलग बैठाकर और फिर इकट्ठे बैठाकर बयान दर्ज किए गए।

 मारे गए आतंकी सोना का पुत्र था नौकर गुरसाहिब

गुरसाहिब सिंह साबा का चाचा कुलदीप सिंह अपने भतीजे की मौत पर उस घड़ी को कोसता रहा जब इस परिवार के साथ उसका मेल जोल हुआ। गुरसाहिब सिंह का पिता बख्शीश सिंह उर्फ सोना आतंकियों से जुड़ा रहा और मारा गया था। गुरसाहिब सिंह के चाचा कुलदीप सिंह ने बताया कि ब्रिज लाल का पूरा परिवार ही नशा तस्करी करता था परंतु उसका भतीजा नशे से पूरी तरह दूर था।

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