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    शंभू बॉर्डर पर एक और किसान ने की सुसाइड; परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से किया मना

    Updated: Thu, 09 Jan 2025 12:06 PM (IST)

    पंजाब में किसानों को आंदोलन जारी है। इस बीच तरणतारन के शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान एक किसान ने सल्फास निगलकर आत्महत्या का प्रयास किया। किसान को गंभीर हालत में अस्पातल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है। बता दें कि किसान एमएसपी गारंटी कानून सहित अन्य मांगों को लेकर काफी लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।

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    शंभू बॉर्डर पर जहर खा कर आत्महत्या करने वाले रेशम सिंह।

    धर्मवीर सिंह मल्हार, तरनतारन। किसानी आंदोलन के मद्देनजर शंभू बॉर्डर पर धरना देने गए तरनतारन जिले के किसान रेशम सिंह (47) ने गुरुवार की सुबह सल्फास निगल ली।

    रेशम सिंह को राजपुरा अस्पताल (पटियाला) ले जाया गया। जहां 11 बजे उक्त किसान को मृत घोषित कर दिया गया। रेशम सिंह की मौत की खबर मिलते ही गांव पहुविंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

    धरने में शामिल होने के लिए 6 जनवरी को हुआ था रवाना

    जिला तरनतारन के विधानसभा हलका खेमकरण के गांव पहुविंड निवासी जगतार सिंह के बेटे रेशम सिंह छह जनवरी को अपने गांव से किसानों का जत्था लेकर शंभू बॉर्डर के लिए रवाना हुए। गुरुवार को उनके बेटे इंद्रजीत सिंह को शंभू बॉर्डर से सूचना मिली कि किसानी आंदोलन से आहत होकर उनके पिता ने सल्फास निगल ली है।

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    यह भी पढ़ें- शंभू बॉर्डर पर सल्फास निगलने वाले रणजोध सिंह की मौत, किसान नेता बोले- सरकार की नीतियों से आहत होकर उठाया ऐसा कदम

    साथी किसानों द्वारा रेशम सिंह को पटियाला जिले के राजपुरा अस्पताल में दाखिल करवाया गया। डॉक्टरों द्वारा रेशम सिंह को बचाने के लिए काफी प्रयास किए गए लेकिन उनकी मौत हो गई।

    दिल्ली में भी किसान आंदोलन में हुए थे शामिल

    रेशम सिंह की पत्नी दविंदर कौर ने बताया कि उनका परिवार पूरी तरह से किसानी आंदोलन को समर्पित रहा है। दिल्ली आंदोलन के दौरान भी रेशम सिंह गांव से किसानों का जत्था लेकर कई दिन वहां डटे रहे।

    मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन रजवंत सिंह संधू, पूर्व सरपंच इंद्रबीर सिंह पहुविंड, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जोन अध्यक्ष दिलबाग सिंह पहुविंड, जगीर सिंह, गुरसेवक सिंह, बीरा सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार तीनों कृषि कानून दोबारा लागू करना चाहती है।

    दिल्ली आंदोलन के दौरान कई किसानों ने कुर्बानी दी। उस समय मोदी सरकार ने अपना फैसला वापस लेने की घोषणा की थी लेकिन अब दोबारा किसान विरोधी कानून जारी करने का प्रयास किया जा रहा है।

    नहीं किया जाएगा अंतिम संस्कार

    रेशम सिंह की पत्नी दविंदर कौर, बेटे इंद्रजीत सिंह ने दैनिक जागरण को बताया कि शंभू व खनौरी बॉर्डर पर हजारों किसान धरना दे रहे हैं। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन 45वें दिन भी जारी रहा।

    उनकी हालत दिन-प्रतिदिन नाजुक हो रही है लेकिन केंद्र सरकार किसानों की मांगें नहीं मान रही। परिवार ने फैसला किया है कि रेशम सिंह का अंतिम संस्कार तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक किसानी मांगें पूरी नहीं होती।

    25 लाख का मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग

    किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सभरां ने किसानी आंदोलन दौरान जान गंवाने वाले रेशम सिंह पहुविंड की कुर्बानी भुलाई नहीं जा सकती। किसान के परिवार को 25 लाख का मुआवजा, सामूहिक कर्ज माफी, परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

    साथ ही उन सभी मांगों को पूरा किया जाए। जिनके लिए दो मोर्चे लगे हुए हैं। इस मौके हरप्रीत सिंह सिधवां, सतनाम सिंह माणोचाहल, हरजिंदर सिंह शकरी, मनजिंदर सिंह गोहलवड़, सलविंदर सिंह जीओबाला, सलविंदर सिंह चोताला ने रेशम सिंह पहुविंड को श्रद्धांजलि भेंट की।

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