Bathinda AIIMS Controversy: बठिंडा एम्स का नोटिस वापस, लेकिन असली समस्या बरकरार, यह है विवाद की जड़
Bathinda AIIMS Controversy बठिडा एम्स ने पीजी के करीब 50 विद्यार्थियों को जूनियर रेजिडेंट बताने का जारी नोटिस तो वापस ले लिया है लेकिन असली समस्या बरकरार है। समस्या यह है कि अब तक ओटी और आइपीडी की सेवाएं नहीं शुरू हुई है।

बठिंडा, [साहिल गर्ग]। Bathinda AIIMS Controversy: बठिंडा एम्स प्रशासन ने पोस्ट ग्रंजुएट (पीजी) विद्यार्थियों को जूनियर रेजिडेंट माने जाने को लेकर जारी नोटिस वापस तो ले लिया है। इससे विद्यार्थी अब पीजी कोर्स तो कर सकेंगे, लेकिन वे प्रैक्टिकल कहां करेंगे, यह बड़ा सवाल है। कारण, संस्थान में इनपेशेंट डिपार्टमेंट (आइपीडी) और आपरेशन थियेटर (ओटी) सेवाएं अभी शुरू नहीं हो पाई हैं। इनके शुरू न होने छात्र प्रैक्टिकल नहीं कर सकेंगे। यहां पर जनवरी से कक्षाएं चल रही हैैं।
बता दें कि बठिंडा एम्स में आइपीडी को अक्टूबर, 2019 में शुरू करना था, लेकिन यहां पर तो ओपीडी सेवा 23 दिसंबर, 2019 को शुरू हुई। यहां पर पहले सत्र के लिए प्रवेश अगस्त, 2019 में हुआ था। इस सत्र के विद्यार्थियों को एमबीबीएस की कक्षाएं फरीदकोट के मेडिकल कालेज में लगानी पड़ीं। एम्स में इस समय बेशक आइपीडी को ट्रायल बेस पर चलाया जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से कब शुरू होगा, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
स्थिति तो यह हैं कि एम्स में अगर हड्डियों से संबंधित बीमारी का आपरेशन करवाना है तो कम से कम दो माह के बाद की तिथि मिलेगी। आइपीडी में 740 बेड की सुविधा है, लेकिन वर्तमान में केवल 100 बेड का ही उपयोग किया जा रहा है। यहीं नहीं, हर विभाग के लिए हर अलग-अलग बेड भी दिए गए हैं, मगर उनका उपयोग नहीं हो रहा है।
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ऐसे में यह सवाल खड़ा होता कि बिना ओटी या आइपीडी के छात्र कोर्स करने के बाद भी प्रैक्टिल कैसे करेंगे? एम्स प्रबंधकों का दावा है कि आइपीडी बनकर तैयार हो चुका है, जिसको कुछ समय में शुरू कर दिया जाएगा।
सत्ता में आने के एक साल बाद कांग्रेस ने दिया था फंड
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 नवंबर, 2016 को एम्स का नींवपत्थर तो रख दिया था, लेकिन इसका निर्माण देरी से शुरू हुआ। वर्ष 2017 में राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद प्रोजेक्ट बिल्कुल ही बंद हो गया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मुद्दा उठाया तो पंजाब सरकार सक्रिय हुई।
हरसिमरत कौर ने निर्माण शुरू करवाने के लिए पहले 11 मई, 2018 को एम्स की जगह का दौरा किया। उस समय देखा कि यहां पर न तो बिजली कनेक्शन था न ही संपर्क मार्ग बना था। इसके बाद उन्होंने पंजाब सरकार को लगातार पत्र भी लिखे। इसके बाद मार्च, 2017 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने एक साल बाद फंड देकर यहां पर बिजली ग्रिड बनवाया और एम्स तक जाने के लिए सड़क का निर्माण करवाया।
यह है मामला
जनवरी, 2022 में देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान बठिंडा एम्स में करीब 50 विद्यार्थियों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (पीजी) में दाखिला लिया था। फरवरी से कक्षाएं शुरू हो गई थीं। लेकिन छह माह बाद 21 जुलाई को बठिंडा एम्स प्रबंधन ने सभी 50 विद्यार्थियों को एक मेल के जरिये जानकारी दी कि उन्हें पीजी स्टूडेंट नहीं माना जाएगा। संस्थान इन सभी को नान एकेडमिक जेआरएस (जूनियर रिजिडेंट) मानकर चलेगा।
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इसके विरोध में विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था। विद्यार्थियों का आरोप है कि उन्होंने एमडी, एमएस, एमडीएस में प्रवेश लिया था, लेकिन अब एम्स के अधिकारी कह रहे हैं कि उनका प्रवेश एक फरवरी से इसलिए मान्य नहीं होगा, क्योंकि डिग्री के लिए ओटी (आपरेशन थियेटर) व एमरजेंसी में काम करना जरूरी है। एम्स में अभी भी ओटी व इमरजेंसी की सुविधा पूरी तरह से शुरू नहीं हुई है।
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