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    पाकिस्तान की Composite Hockey को टक्कर दे रही जालंधर की स्टिक, 150 किमी की स्पीड से निकलती है गेंद, जानें खासियतें

    By Pankaj DwivediEdited By:
    Updated: Sat, 07 Aug 2021 08:22 AM (IST)

    नए भारत के साथ हॉकी स्टिक का स्वरूप भी बदल रहा है। अब लकड़ी से तैयार हाकी स्टिक की जगह कंपोजिट हॉकी स्टिक ले रही है। पहले पंजाब की इंडस्ट्री पाकिस्तान से कंपोजिट हाकी मंगवाती थी। पहले खिलाड़ी पाकिस्तान में तैयार हॉकी से खेलते थे।

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    अल्फा हॉकी इंडस्ट्री ने वर्ष 2010 में जालंधर में पहला कंपोजिट हॉकी यूनिट लगाया था। जागरण

    कमल किशोर, जालंधर। टोक्यो में ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक पर मुहर लगने से हाकी की तस्वीर बदलेगी। साथ ही खिलाड़ियों की तकदीर बदलने के साथ-साथ कंपोजिट हाकी निर्माताओं का कारोबार में बढ़ोतरी होनी भी तय है। अब फिर बच्चे बल्ला पकड़ने की बजाए हॉकी स्टिक पकड़ते दिखाई देंगे। नए भारत के साथ हॉकी स्टिक का स्वरूप भी बदल रहा है। अब लकड़ी से तैयार हाकी स्टिक की जगह कंपोजिट हॉकी स्टिक ले रही है। पहले पंजाब की इंडस्ट्री पाकिस्तान से कंपोजिट हाकी मंगवाती थी। पहले खिलाड़ी पाकिस्तान में तैयार हॉकी से खेलते थे। लेकिन अब उन्होंने जालंधर में तैयार कंपोजिट हॉकी थाम ली है।

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    पाकिस्तान कंपोजिट हाकी स्टिक को टक्कर अल्फा हाकी इंडस्ट्री ने दी। वर्ष 2010 में अपना पहला यूनिट लेदर कांप्लेक्स में लगाया। राज्य में कुल 4 मेन कंपोजिट हाकी तैयार करने वाले यूनिट हैं, जिसमें अल्फा, रक्षक स्पोर्ट्स, फ्लैश व एसएनएस हैं। चारों यूनिट देश के साथ-साथ यूरोपियन देशों में हॉकी एक्सपोर्ट करते हैं। यूनिट प्रति वर्ष 80,000 से अधिक हॉकी तैयार कर रहे हैं। राज्य में कुल मिलाकर छोटे-बड़े 8 यूनिट हैं, जो प्रति वर्ष करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं।

    ऐसे बनती है कंपोजिट हॉकी

    कार्बन व फाइबर को मिलाकर हीट वाली मशीन में डाला जाता है। मशीन में हाकी शेप की डाई बनी होती है। बीस से तीस मिनट तक रखने के बाद मशीन से हॉकी को बाहर निकाला जाता है। फिर उसे फर्निश किया जाता है। हॉकी का भार 500 से 550 ग्राम के बीच होता है। लकड़ी की हॉकी से बाल लगने के बाद स्पीड 80 से 90 किमी प्रति घंटा तक रहती थी। कंपोजिट हॉकी से बाल लगने के बाद स्पीड 140 से 150 से निकलती है। 

    अल्फा हाकी इंडस्ट्री ने खोला पहला यूनिट

    पाकिस्तान की कंपोजिट हॉकी को टक्कर अल्फा हाकी इंडस्ट्री ने जालंधर में यूनिट लगाकर दिया। इंडस्ट्री में तैयार होने वाली हॉकी अंतरराष्ट्रीय मानदंड पर खरी उतर रही है। इंडस्ट्री रोजाना 150 से 200 हॉकी तैयार कर रही है। क्वालिटी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा रहा है।

    रक्षक स्पोर्ट्स के एमडी संजय कोहली और अल्फा हॉकी इंडस्ट्री के एमडी नितिन महाजन व जतिन महाजन।

    अल्फा हॉकी इंडस्ट्री के एमडी जतिन महाजन व नितिन महाजन ने कहा कि पाकिस्तान की कंपोजिट हाॉकी को टक्कर देने के लिए जालंधर में यूनिट खोला। हाकी निर्माता पाकिस्तान से कंपोजिट हॉकी आयात करवाते थे। पहला यूनिट लगने के बाद धीरे-धीरे अन्य हॉकी निर्माताओं ने कंपोजिट हॉकी तैयार करनी शुरू कर दी। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों की बात करें तो 8 खिलाड़ी अल्फा स्टिक से खेले हैं। 

    ओलिंपिक पदक के बाद कारोबार बढ़ने की उम्मीद

    रक्षक स्पोर्ट्स के एमडी संजय कोहली ने कहा कि लकड़ी से तैयार होने वाली स्टिक की जगह कंपोजिट हॉकी ले रही है। टर्फ में कंपोजिट हॉकी कारगर है। बाल स्पीड से निकलती है। टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने के बाद कंपोजिट हाकी के कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। नई पौध हाकी खेल की तरफ आकर्षित होगी।

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