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    Diljit Dosanjh: 150 रुपये ने बदली तकदीर... ये जिगरी दोस्त न होता तो आज इतनी ऊंचाइयों पर नहीं होते दिलजीत दोसांझ

    Updated: Fri, 27 Dec 2024 07:00 AM (IST)

    दिलजीत दोसांझ की कहानी एक ऐसे दोस्त की है जिसने उनकी किस्मत बदल दी। जब दिलजीत के पास चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम में जाने के लिए पैसे नहीं थे तो उनके बचपन के दोस्त तजिंदर सिंह कोहली ने उन्हें 150 रुपये दिए। दिलजीत ने अपनी सफलता के बाद भी कोहली की दोस्ती को नहीं भुलाया और उन्हें हमेशा अपने साथ रखा।

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    Diljit Dosanjh Concert: दिलजीत दोसांझ की सक्सेस स्टोरी (जागरण फाइल फोटो)

    भूपेंदर सिंह भाटिया, जालंधर।,लुधियाना। यह दिलजीत का शहर है। यहीं वह पढ़ा-लिखा और फिर बड़ा होकर यहीं से गायकी की दुनिया में कदम रखा। इस शहर से दिलजीत की कई यादें जुड़ी हैं। कई ऐसे दोस्त बने, जो उसके दिल में बस गए।

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    करोड़ों-अरबों का मालिक दिलजीत एक समय इसी शहर में चंद रुपये के लिए भी मोहताज रहा। हालांकि, उन दिनों जिन दोस्तों ने मदद की, वह उन्हें कभी नहीं भूला। इनमें से एक ऐसा दोस्त है, जो आज भी दिलजीत की वायरल होने वाली रील्स में उसके साथ चलता दिखाई देता है। यह है दुगरी का रहने वाला बचपन का दोस्त तजिंदर सिंह कोहली।

    अब साए की तरह रहता है दोस्त

    कड़की के दिनों में साथ देने वाला कोहली अब देश-विदेश में उसके साथ साए की तरह रहता है। हाल में जब दिलजीत कश्मीर की वादियों में चंद दिन छुट्टियां बिताने गया तो कोहली भी उसके साथ ही था। शहर के जानकार बताते हैं कि एक समय दिलजीत छोटे-मोटे कार्यक्रम करता था।

    कई बार उसके पास कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के लिए पैसों की व्यवस्था नहीं हो पाती थी। चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम में दिलजीत ने जाना था, तो उसके पास वहां पहुंचने के लिए पैसे नहीं थे। उसे बस में आने-जाने के लिए कोहली ने 150 रुपये दिए थे। जब दिलजीत बुलंदियों पर पहुंचे तो वह कोहली की दोस्ती को नहीं भूला पाए।

    उन्होंने कोहली को हमेशा के लिए अपने साथ रख लिया। अब दिलजीत कहीं भी कॉन्सर्ट के लिए जाता है। भले वह देश हो या विदेश, कोहली हमेशा उसके साथ रहता है।

    इतना ही नहीं, दिलजीत जब भी लुधियाना आता है तो कोहली के घर जरूर पहुंचता है। वह भी रात के अंधेरे में, ताकि किसी को खबर न मिले कि दिलजीत शहर में है।कोहली के पड़ोसियों तक को इसकी भनक नहीं लगती।

    11 साल का दिलजीत पहुंचा था लुधियाना

    जालंधर के दोसांझ कलां में जन्मे दिलजीत 11 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर लुधियाना आ गए। स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही वह धार्मिक शब्द गाने लगे।

    लुधियाना में ही दिलजीत का पहला एलबम ‘इश्क दा ऊड़ा-ऐड़ा’ लांच हुआ। दिलजीत के लुधियाना प्रेम का अंदाज इसी से लगा सकते हैं कि पिछले दिनों वह एक फिल्म की प्रमोशन के लिए आए थे और घंटाघर व चौड़ा बाजार में घूमे थे।

    दिलजीत सड़क किनारे छोले-कुलचे खाते हुए इतने उत्साहित दिखे कि उन्होंने कहा, ‘यह मेरा रिअल लुधियाना है...मेरा शहर लुधियाना।’

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    टिकट खरीदने का एक और मौका

    31 दिसंबर को दिलजीत दोसांझ के होने वाले कार्यक्रम की टिकट से वंचित रहे उनके प्रशंसकों के लिए अच्छी खबर है। 27 दिसंबर दोपहर दो बजे आयोजकों की ओर से ब्राउन टिकट जारी की जाएगी।

    हालांकि, यह बाक्स मंच से काफी दूर होगा और कॉन्सर्ट में रहते हुए प्रशंसक स्क्रीन पर कार्यक्रम का लुत्फ उठा पाएंगे। इसकी कीमत 3000 रुपये होगी। खास बात यह है कि ऑनलाइन जोमेटो के अलावा तीन काउंटर पर भी टिकट उपलब्ध होगी। यह काउंटर रखबाग, रोज गार्डन और लैय्यर वैली में खोले जाएंगे।

    टिकट ब्लैक करने वालों पर पुलिस की नजर

    दिलजीत दोसांझ के पीएयू में होने वाले कॉन्सर्ट को लेकर दर्शकों में उत्सुकता है। हालात ये हैं कि वो टिकट की कोई भी कीमत देने को तैयार हैं। इसका फायदा टिकटें ब्लैक करने वाले उठा रहे हैं। वो 5 हजार की टिकट के बदले में 15 हजार, 10 हजार वाली 20 हजार और 15 हजार वाली के बदले में 30 से 50 हजार वसूले जा रहे हैं।

    जो टिकट 50 हजार की है, उसके बदले में 65 से 70 हजार तक की वसूली हो रही है। लोग इंटरनेट मीडिया पर लिखकर डाल रहे हैं कि अगर किसी को टिकट चाहिए तो वो पर्सनल मैसेज करे और लोग खरीद भी रहे हैं।

    उधर, पुलिस कमिश्नर कुलदीप सिंह चाहल ने मीडिया के सामने कहा कि उन्हें ब्लैक करने जैसी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत देता है तो उसके आधार पर बनती कार्रवाई की जाएगी। हमारी तरफ से सुरक्षा इंतजाम कड़े किए गए।

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