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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 18, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

परिवार के पांच लाेगों की सामूहिक खुदकुशी मामले में डीएसपी व पूर्व डीआइजी सहित छह दोषी करार

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Tue, 18 Feb 2020 04:43 PM (IST)

अमृतसर में करीब 15 साल पहले एक परिवार के पांच लोगों द्वारा खुदकुशी मामले में अदालत ने एक डीएसपी व पूर्व डीआइजी सहित छह लोगों को दोषी करार दिया है।

परिवार के पांच लाेगों की सामूहिक खुदकुशी मामले में डीएसपी व पूर्व डीआइजी सहित छह दोषी करार
परिवार के पांच लाेगों की सामूहिक खुदकुशी मामले में डीएसपी व पूर्व डीआइजी सहित छह दोषी करार

अमृतसर, जेएनएन। अदालत ने यहां एक परिवार के पांच लाेगों द्वारा सामूहि‍क आत्‍महत्‍या के मामले में छह लोगों को दोषी करार दिया है। 30 अक्टूबर 2004 को चौक मोनी में रहने वाले हरदीप सिंह नामक व्‍यक्ति ने मां, पत्‍नी, बेटे व बेटी के साथ सामूहिक आत्महत्या कर ली थी। अदालत द्वारा दोषी करार लोगों में पूर्व डीआइजी कुलतार सिंह, वर्तमान में गोइंदवाल साहिब के डीएसपी व तत्कालीन एसएचओ हरदेव सिंह बोपाराय शामिल हैं। कोर्ट ने यह फैसला आत्महत्या के लिए उकसाने और ब्लैकमेलिंग के आधार पर सुनाया है।

ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर व्‍यक्ति ने मां, पत्‍नी, बेटे व बेटी के साथ 2004 में की थी आत्महत्या

दोषियों में हरदीप के ताया महिंदर सिंह, उसकी बहू सबरीन कौर, बेटी परमिंदर कौर और दामाद पलविंदर पाल सिंह भी शामिल हैं। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप ङ्क्षसह बाजवा की अदालत सभी दोषियों को 19 फरवरी को सजा सुनाएगी।

चौक मोनी में रहने वाले हरदीप सिंह का अपने पिता सुंदर सिंह के साथ विवाद चल रहा था। 11 अगस्त 2004 को झगड़े में हरदीप के हाथों पिता की मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद हरदीप शव ठिकाने लगा रहा था तो उसके ताया महिंदर सिंह की बहू सबरीन कौर ने देख लिया। इसके बाद महिंदर सिंह, सबरीन कौर, परमिंदर कौर और उसके पति पलविंदर पाल सिंह ने पुलिस से पकड़वाने की धमकियां देकर हरदीप को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था।

मामले के अनुसार, आरोपितों ने धमकाकर हरदीप से सात लाख रुपये ले लिए थे। इनके चंगुल से छुटकारा पाने के लिए हरदीप के एक दोस्त ने उसकी मुलाकात तत्कालीन एसएसपी कुलतार सिंह के साथ करवाई। कुलतार सिंह ने हरदीप के खिलाफ कमजोर केस दर्ज करने के लिए पांच लाख रुपये लिए। बाद में सात लाख रुपये की और मांग करने लगा। आरोप है कि कुलतार ने हरदीप की पत्‍नी के साथ अपने दफ्तर में दुष्कर्म भी किया था। आरोप है कि वह हरदीप को ब्लैकमेल करते हुए उसकी पत्‍नी को चंडीगढ़ के एक गेस्ट हाउस में भी लेकर गया था। कुलतार अब डीआइजी के पद से रिटायर्ड हो चुका है।

आत्महत्या से पहले दीवार पर लिखा था आरोपितों के नाम

अंतत: पुलिस और रिश्तेदारों की ब्लैकमेलिंग से परेशान हरदीप सिंह ने 30 अक्टूबर 2004 की रात मां जसवंत कौर, पत्‍नी रोमी, बेटे इमरत (6) और बेटे सनमीत (9) के साथ घर में आत्महत्या कर ली। हरदीप ने आत्महत्या से पहले घर की दीवार पर लिखे सुसाइड नोट पर उक्त आरोपितों के नाम लिखे थे। सी डिवीजन थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर हरदेव सिंह जब घटना स्थल पर पहुंचे तो उन्होंने कुलतार के आदेश पर दीवार पर लिखे गए सुसाइड नोट को मिटाना शुरू किया था लेकिन मीडिया के पहुंचने से मामले का राजफाश हो गया था।

 

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