नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। Neelam Sanjiva Reddy: देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस (Congress) अपने नए अध्यक्ष की तलाश में लगी हुई है। नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत 24 सितंबर से हो चुकी है, जो 30 सितंबर तक चलेगी। कांग्रेस के नए अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा 19 अक्टूबर को होगी। आज हम आपको कांग्रेस के ऐसे अध्यक्ष के बारे में बताएंगे, जो निर्विरोध चुने जाने वाले देश के पहले राष्ट्रपति थे। उस अध्यक्ष का नाम था- नीलम संजीव रेड्डी।

देश के छठे राष्ट्रपति

नीलम संजीव रेड्डी कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। वे 1960 में पार्टी के अध्यक्ष बने और 1963 तक इस पद पर रहे। इसके बाद वे देश के छठे राष्ट्रपति बने। वे 25 जुलाई 1977 से लेकर 25 जुलाई 1982 तक इस पद पर रहे।

जीवन परिचय

नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को हुआ था। उनके पिता का नाम नील चिनप्पा रेड्डी था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा थियोसोफिकल हाईस्कूल, अड़यार, मद्रास से हुई। उन्होंने आगे की शिक्षा आर्ट्स कालेज अनंतपुर से प्राप्त की। रेड्डी की शादी 8 जून 1935 को नागा रत्नमा के साथ हुआ। उनकी चार संतानें हैं, जिनमें एक पुत्र और तीन पुत्रियां शामिल हैं। महात्मा गांधी के आह्वान पर वे 20 साल की उम्र में ही आंदोलन में कूद पड़े। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

इंदिरा गांधी की वजह से हारे राष्ट्रपति चुनाव

नीलम संजीव रेड्डी 1969 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा, लेकिन इंदिरा गांधी की वजह से हार गए। इंदिरा ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया था। हालांकि, जब 11 फरवरी 1977 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की अचानक मौत हो गई तो फिर नीलम संजीव रेड्डी को निर्विरोध राष्ट्रपति चुना गया। उन्हें जनता पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया था।

कब हुआ था चुनाव?

रेड्डी की मौत के एक दिन पहले ही लोकसभा चुनाव का आगाज हुआ था, जो 13 मई तक चला था। इस वजह से राष्ट्रपति का चुनाव तुरंत नहीं हो सका था। राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना 4 जुलाई 1977 को जारी हुई। मतदान 6 अगस्त को होना था। हालांकि, उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से पहले 21 जुलाई 1977 को रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए। उस समय रेड्डी की उम्र 64 वर्ष की थी।

आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री

नीलम संजीव रेड्डी आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे। वे देश के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे, जो लोकसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री रह चुके थे। रेड्डी महात्मा गांधी से काफी प्रेरित थे। वे तीन बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसके अलावा, उन्होंने इंदिरा सरकार में परिवहन, नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने जनवरी 1966 से मार्च 1967 तक यह जिम्मेदारी संभाली। वे 1952 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे।

राजनीति से संन्यास

जब इंदिरा गांधी ने रेड्डी के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का विरोध किया तो वे इतना दुखी हो गए कि वे सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिए और घर पर आकर खेती-बाड़ी करने लगे। हालांकि, जब जनता पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया तो उन्होंने अपने संन्यास को तोड़ दिया।

1996 में हुआ निधन

उनका निधन एक जून 1996 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका जीवन दुखों से भरा रहा है। उनके पांच साल के बेटे की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस घटना से वे इतने दुखी हुए कि आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्षता से त्यागपत्र दे दिया था।

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Edited By: Achyut Kumar

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