Odisha News: पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में मरम्मत का काम जारी, इस महीने हो सकता है पूरा
पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मरम्मत का काम अगले महीने तक पूरा होने की उम्मीद है। न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ के अनुसार एएसआई द्वारा किया जा रहा मरम्मत कार्य लगभग अंतिम चरण में है। अगले 100 वर्षों को ध्यान में रखते हुए मरम्मत की जा रही है। मरम्मत पूरी होने के बाद रत्नों की गिनती और मरम्मत की प्रक्रिया शुरू होगी।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। पुरी जगन्नाथ मंदिर रत्नभंडार निगरानी समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ ने शुक्रवार को पुरी का दौरा कर रत्नभंडार के मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया। जस्टिस रथ शुक्रवार की सुबह मंदिर पहुंच गए और सबसे पहले महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन किए।
अगले महीने तक मरम्मत पूरी होने की उम्मीद
इसके बाद उन्होंने रत्न भंडार मरम्मत कार्य का निरीक्षण करते हुए कहा कि जिस तरह से मरम्मत का काम चल रहा है, उससे उम्मीद है कि अगले महीने तक मरम्मत का कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद रत्नों की मरम्मत एवं गिनती की प्रक्रिया शुरू होगी।
निरीक्षण के बाद न्यायमूर्ति रथ ने कहा कि एएसआइ रत्न भंडार का मरम्मत कार्य कर रही है। आंतरिक रत्न भंडार के मरम्मत का कार्य लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है। आंतरिक रत्न भंडार की दीवारों और फर्श में दरारें होने के कारण इसकी मरम्मत की गई है। क्षतिग्रस्त पत्थरों को बदल दिया गया है।
इसी तरह बाहरी रत्न भंडार के मरम्मत का काम प्रगति पर है। अलग-अलग समय पर महाप्रभु की विशेष रीति-नीति होने और भक्तों की भारी-भीड़ के कारण, समय-समय पर रत्न भंडार के मरम्मत के काम को रोकना पड़ा है।
100 साल को ध्यान में रखकर मरम्मत
जस्टिस विश्वनाथ रथ ने कहा कि अगले 100 साल को ध्यान में रखकर मरम्मत का काम किया जा रहा है। पांच खराब हो चुकी बीम को मजबूत स्टील बीम से बदला गया है। उन्होंने कहा कि पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का बहुप्रतीक्षित जीर्णोद्धार कार्य अगले महीने के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
रत्नों की मरम्मत व गिनती शुरू होगी
न्यायमूर्ति रथ ने कहा कि मरम्मत कार्य पूरा हो जाने के बाद पूर्व-स्थापित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार आभूषणों और गहनों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। न्यायमूर्ति रथ ने कहा कि अभी बहुत काम किया जाना है।
रत्न भंडार के अंदरूनी हिस्से की दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। भगवान की कृपा से समय रहते मरम्मत का काम पूरा हो गया। मरम्मत का काम कम से कम अगले 100 सालों तक को ध्यान में रखकर किया गया है।
एएसआइ अधिकारी सही तरह की सामग्री का इस्तेमाल करके मरम्मत का काम ठीक से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम रोजाना तीन से चार घंटे तक किया जा रहा है। काम की गति को देखते हुए उम्मीद है कि यह अगले महीने के भीतर पूरा हो जाएगा। काम पूरा होने के बाद जीर्णोद्धार और गिनती का काम शुरू किया जाएगा।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।