बालेश्वर, लावा पांडे। आज के विज्ञान के युग में भी ऐसे कई रहस्य हैं जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है आज हम बात करेंगे ओडिशा के क्योंझर जिला में स्थित मां तारिणी के बारे में। पूरे ओडिशा में इस देवी का इतना बड़ा प्रभाव है कि देवी तारिणी की मूर्ति कहीं भी रख दो चाहें सड़क के किनारे, भीड़भाड़ वाले इलाके में या फिर चौराहे पर वहां पर अपने आप नारियल के कृत्रिम पहाड़ बनने लगते हैं।

नारियल देख रुक जाती है गाड़ी 

मां तारिणी का प्रसाद नारियल माना जाता है और नारियल ही चढ़ाया जाता है इसके साथ ही एक अन्य चमत्कार यह भी है कि यदि सड़क के किनारे खड़े होकर कोई भी साधारण व्यक्ति किसी भी बड़ी गाड़ी को चाहे ट्रक हो या फिर बस नारियल दिखाता है तो वह गाड़ी जरूर रुक जाती है और उक्त व्यक्ति से नारियल लेकर तब आगे बढ़ती है।

नारियल लेने पर हो सकती है दुर्घटना

ऐसा माना जाता है जो गाड़ी वाला उक्त व्यक्ति से नारियल नहीं संग्रह करेगा वह गाड़ी किसी भी दुर्घटना का शिकार हो सकती है, इसीलिए चाहे कोई भी गाड़ी वाला हो मालवाहक ट्रक हो यात्री बस या फिर छोटी चार पहिया गाड़ियां वे नारियल अवश्य ले लेते हैं। नारियल लेने के बाद यह गाड़ी वाले घटगांव मां तारिणी के दरबार जाने वाले किसी अन्य गाड़ियों को सौंप देते हैं या फिर उक्त नारियल को उसी स्थान पर रख देते हैं जहां पर माता रानी की तस्वीर लगी होती है।

पूरे ओडिशा में है मां तारिणी का प्रभाव 

ऐसा नहीं है कि ओडिशा के केवल चंद जिलों में ही इस देवी का प्रभाव है बल्कि पूरे ओडिशा में हर जिले में हर शहर में मां तारिणी का इस तरह का प्रभाव देखा जाता है। अब मां तारिणी के घटगांव में भव्य मंदिर बन चुका है अब केवल ओडिशा से नहीं बल्कि ओडिशा के बाहर से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु जब ओडिशा आते हैं, मुख्यतः जब उत्तरी ओडिशा का दौरा करते हैं तब वह क्योंझर जिला के मां तारिणी के आश्रम जाना नहीं भूलते।

पूरी होती है मनोकामना 

यहां एक बात और हम बता दें कि देवी को जो नारियल भक्त भेंट करते हैं उस नारियल के साथ एक अगरबत्‍ती, एक सिंदूर की पुड़िया, मां की चुनरी और कुछ दक्षिणा नारियल के साथ बांध देते हैं। कई लोग पूरे वर्ष मंगलवार या फिर शनिवार के दिन मां तारिणी को नारियल अर्पित करते हैं। कुछ लोग जो सीधे नारियल घटगांव नहीं भेज पाते वह शहर के विभिन्न स्थानों पर रखी गई मां तारिणी के तस्वीर के पास उक्त नारियल, जिसमें सिंदूर अगरबत्ती और दक्षिणा बंधी रहती है उस स्थान पर रख देते हैं। लोगों का मानना है कि इससे उनकी मनोकामना पूरी होती है।

तस्‍वीर के आगे बन जाते हैं कृत्रिम पहाड़

आज पूरे ओडिशा में जहां भी मां तारिणी की तस्वीर रख दी जाती है वहां नारियल के कृत्रिम पहाड़ बनने लगते हैं। एक बात यहां हम और चर्चा करेंगे की नारियल के जब कृत्रिम पहाड़ बनते हैं तो उन्हें घटगांव कैसे भेजा जाता है। यह भी बड़े आश्चर्य की बात है कई भक्त ऐसे हैं जो कि बिना पैसा लिए मुफ्त में ही मालवाहक ट्रकों से उक्त नारियल को घटगांव तक मां तारिणी के आश्रम तक पहुंचा देते हैं। इस तरह के कार्य करने वाले कई भक्तों ने हमें बताया कि इससे बड़ा पुण्य का कार्य और कुछ नहीं है की देवी के आश्रम तक नारियल पहुंचाने का हमें सौभाग्य प्राप्त होता है।

गाड़ियां में भर मंदिर तक पहुंचाये जाते हैं नारियल

लोगों की माने तो क्योंझर के घटगांव आश्रम से भी कई गाड़ियां आती हैं जो कि मुफ्त में इन नारियलों को शहर के विभिन्न जगहों से बटोर कर घटगांव ले जाती हैं यह गाड़ियां मंदिर प्रबंधक द्वारा संचालित की जाती है। आज यदि यह कहा जाए कि विज्ञान के युग में भी मां तारिणी जैसी देवी का चमत्कार और प्रभाव आम जनता के मन में है तो शायद कम नहीं होगा।

कोई नहीं चुराता नारियल 

एक और आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि जिस जगह पर मां तारिणी की तस्वीर के आगे रखे नारियल के पहाड़ में से नारियल कोई नहीं चुराता है। ये नारियल कई महीनों तक उक्‍त तस्‍वीर के आगे रखे रहते हैं। ऐसी मान्‍यता है कि मां के आगे से नारियल चुराने वालों को नुकसान जरूर होता है।

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Edited By: Babita Kashyap

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