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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 09, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तर-पश्चिम म्यांमार में रोहिंग्याओं के आठ गांव जलकर खाक

By Kishor JoshiEdited By:
Published: Sat, 09 Sep 2017 10:36 AM (IST)Updated: Sat, 09 Sep 2017 10:37 AM (IST)

म्यांमार के एक हिस्से में शुक्रवार को आगजनी की ताजा घटना से रोहिंग्या मुस्लिमों की बांग्लादेश की ओर पलायन की संभावना बढ़ गई है।

उत्तर-पश्चिम म्यांमार में रोहिंग्याओं के आठ गांव जलकर खाक
उत्तर-पश्चिम म्यांमार में रोहिंग्याओं के आठ गांव जलकर खाक

यंगून (रायटर)। उत्तर-पश्चिम म्यांमार के एक हिस्से में शुक्रवार को आठ गांव जलकर खाक हो गए। हिंसा से बचने के लिए इन गांवों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों ने शरण भी ली हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों ने बताया कि आगजनी की यह घटना राथेडांग कस्बे में हुई। उनका कहना है कि इस आग में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के शिविर भी जल गए।

इलाके में रखाइन बौद्ध और रोहिंग्या मुस्लिम आबादी साथ-साथ रहती है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इन गांवों में आग किसने लगाई। इलाके में स्वतंत्र पत्रकारों के जाने की मनाही है। मानवाधिकार पर्यवेक्षकों और भाग रहे रोहिंग्याओं का कहना है कि सेना और रखाइन मिलकर मुस्लिम आबादी को बाहर निकालने के लिए अभियान चला रहे हैं। हालांकि, म्यांमार का कहना है कि उसके सुरक्षा बल चरमपंथी आतंकियों का सफाया करने का अभियान चला रहे हैं।

गांवों में आगजनी की ताजा घटना से रोहिंग्या मुस्लिमों की बांग्लादेश की ओर पलायन की संभावना बढ़ गई है। जबकि पिछले दो हफ्तों में करीब 2,70,000 रोहिंग्या पहले ही पलायन कर चुके हैं। राथेडांग का इलाका बांग्लादेश सीमा से काफी दूर है। मानवतावादी कार्यकर्ताओं को आशंका है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम वहां फंस गए हैं। बतातें हैं कि गांववासी अब घने जंगलों में छिप रहे हैं या फिर वे मानसूनी बारिश के बीच दिनभर पैदल चलकर मोंगडॉ क्षेत्र या पश्चिम में उससे भी आगे नफ नदी की ओर जा रहे हैं। यह नदी म्यांमार को बांग्लादेश से अलग करती है।

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