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    क्या उमर खालिद, शरजील इमाम जेल से बाहर आएंगे? सुप्रीम कोर्ट आज करेगा जमानत याचिकाओं पर फैसला 

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 07:00 AM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट आज उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा। ये दोनों 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में पांच अन्य आरोपिय ...और पढ़ें

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    उमर खालिद और शरजील इमाम। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पांच साल से ज्यादा समय से जेल में बंद छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम आखिरकार जेल से बाहर आएंगे या नहीं, यह सोमवार, 5 जनवरी को पता चल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश के मामले में पांच अन्य आरोपियों के साथ उनकी जमानत याचिका पर अपना फैसला सुनाने वाला है।

    जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने पिछले साल 10 दिसंबर को आरोपी और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली पुलिस ने उनकी रिहाई का विरोध करने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाया है।

    क्या है मामला?

    • उमर खालिद 13 सितंबर, 2020 से हिरासत में है, जबकि इमाम को 28 जनवरी, 2020 से जेल में रखा गया है। आरोपियों ने तर्क दिया कि प्रॉसिक्यूशन कथित साजिश को जानबूझकर लंबा खींचने और ट्रायल में देरी करने के लिए एक-एक करके आरोपियों को गिरफ्तार करने की रणनीति अपना रहा है।
    • 2020 के दंगे फरवरी में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कुछ हिस्सों में हुए थे। ये दंगे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर हफ्तों से चल रहे तनाव के बाद हुए थे। यह हिंसा कई दिनों तक चली, जिसमें कई लोगों की मौत हुई, साथ ही घरों, दुकानों और पूजा स्थलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
    • इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा की जांच की और इसे सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एक साजिश बताया। कई एक्टिविस्ट, छात्र और बुद्धिजीवियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कड़े कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया।
    • इनमें जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम और पहले के कैंपस आंदोलनों से जुड़े छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद शामिल थे। पुलिस ने आरोप लगाया कि इनके भाषणों और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ाने में योगदान दिया, इन दावों को दोनों ने खारिज किया है।
    • शरजील इमाम को जेल भेजने के लिए कोर्ट की सुनवाई में सबूत के तौर पर पेश किए गए कामों में से एक वीडियो है, जिसमें वह चिकन नेक कॉरिडोर को ब्लॉक करने और असम को बाकी भारत से अलग करने के बारे में बात करते सुनाई पड़ता है।
    • दिल्ली पुलिस ने एक और वीडियो का भी जिक्र किया है, जिसमें शरजील इमाम कथित तौर पर चक्का जाम करके दिल्ली को पंगु बनाने और दूध और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई रोकने का प्लान बता रहा है।
    • 10 दिसंबर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से बार-बार UAPA की धारा 15 के बारे में सवाल किया, जिसका इस्तेमाल प्रॉसिक्यूशन ने भाषणों और विरोध प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया था।
    • उमर खालिद की भूमिका पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पिछली सुनवाई में खालिद के पिछले रिकॉर्ड का जिक्र किया था, जिसमें 2016 का एक विवादित जेएनयू विरोध प्रदर्शन भी शामिल था। आरोप लगाया था कि खालिद ने "भारत तेरे टुकड़े टुकड़े होंगे" का नारा लगाया था। राजू ने कहा कि नवंबर 2020 में दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट में इस एफआईआर पर भरोसा किया गया था।

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