तंबाकू बेचने वालों के लिए जारी हो गए नए नियम, एक फरवरी से करना होगा ये काम
तंबाकू, गुटखा और जर्दा निर्माताओं को 1 फरवरी से सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी लगाना होगा और फुटेज 24 महीने तक सुरक्षित रखना होगा। वित्त मंत्रालय ने तं ...और पढ़ें

तंबाकू को लेकर जारी नए नियम।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तंबाकू, गुटखा, जर्दा और इसी तरह के अन्य उत्पाद के निर्माताओं को एक फरवरी से सभी पैकिंग मशीनों को कवर करते हुए सीसीटीवी प्रणाली स्थापित करनी होगी और फुटेज को कम-से-कम 24 महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी के अलावा एक फरवरी से लगने वाले अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की अधिसूचना जारी कर दी।
देनी होगी मशीनों की संख्या और क्षमता की जानकारी
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि तंबाकू निर्माताओं को उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता की जानकारी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार 15 दिनों तक काम नहीं करती है तो वे उत्पाद शुल्क में छूट का दावा भी कर सकते हैं।
ये नियम उन निर्माताओं पर लागू होंगे, जो इस तरह के सामान को पाउच में पैक करते हैं। अन्य रूपों (जैसे टिन में) उत्पादन करने वाले निर्माताओं को मूल्यांकन योग्य मूल्य पर लागू शुल्क का भुगतान करना होगा। पाउच में पैक किए गए तंबाकू उत्पाद के निर्माताओं को मशीनों की संख्या, मशीनों की विशिष्टताएं और खुदरा बिक्री मूल्यों का विवरण उत्पाद शुल्क अधिकारियों को देना होगा।
बीड़ी का मामला अलग है
सरकार ने एक फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह मौजूदा जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेगा। वित्त मंत्रालय द्वारा 31 दिसंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और उत्पाद शुल्क 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा। बीड़ी के मामले में यह 18 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा और एक फरवरी से प्रभावी होगा।
तंबाकू उत्पादों (चबाने वाला तंबाकू, खैनी, जर्दा, गुटखा) के लिए एमआरपी आधारित एक नई मूल्यांकन प्रणाली शुरू की गई है। इसके तहत पैकेट पर घोषित खुदरा विक्रय मूल्य के आधार पर जीएसटी निर्धारित किया जाएगा। गुटखा पर 91 प्रतिशत, चबाने वाले तंबाकू पर 82 प्रतिशत और जर्दा पर 82 प्रतिशत का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। सिगरेट पर लंबाई और फिल्टर के आधार पर प्रति 1000 स्टिक 2050 रुपये से 8500 रुपये तक टैक्स लगाया जाएगा।
राज्यों में दिया जाएगा विवरण
उत्पाद शुल्क से प्राप्त आय का वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों में वितरण किया जाएगा। पान मसाला उत्पादन इकाइयों की उत्पादन क्षमता पर स्वास्थ्य उपकर लगाया जाएगा। इस उपकर से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा स्वास्थ्य जागरूकता या अन्य स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के माध्यम से राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।
स्वास्थ्य प्रभाव के अनुसार टैक्स सुनिश्चित होगा
सिगरेट पर एक फरवरी से उत्पाद शुल्क में वृद्धि यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे हानिकारक उत्पादों पर उनके स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ पड़े और तंबाकू कराधान वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। सिगरेट पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी और अलग-अलग दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर लगता है।
जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से पिछले सात वर्ष में सिगरेट पर टैक्स स्थिर रहा है। यह वैश्विक प्रथाओं व सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के विपरीत है जो सिगरेट की कीमतों को तेजी से बढ़ाने के लिए वार्षिक रूप से शुल्क बढ़ाने पर जोर देते हैं। वैश्विक स्तर पर 80 से अधिक देश हर साल तंबाकू करों में संशोधन करते हैं। जीएसटी लागू होने से पहले भारत में भी सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वार्षिक वृद्धि की जाती थी।
विश्व बैंक के अनुसार, भारत में सिगरेट पर कुल कर खुदरा मूल्य का करीब 53 प्रतिशत है जो तंबाकू की खपत में सार्थक कमी लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित 75 प्रतिशत या उससे अधिक के मानक से काफी कम है।

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