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    'ग्राम, काम और राम से परेशानी', शिवराज सिंह का कांग्रेस पर हमला 

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 11:42 PM (IST)

    शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के मनरेगा बचाओ आंदोलन को 'भ्रष्टाचार बचाओ आंदोलन' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को 'ग्राम, काम और राम' से प ...और पढ़ें

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    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस के मनरेगा बचाओ आंदोलन को कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भ्रष्टाचार बचाओ आंदोलन करार दिया है। कहा है कि कांग्रेस को ग्राम, काम और राम से परेशानी है। मनरेगा में फर्जी हाजिरी के कई सुबूत मिले थे। ग्राम सभाओं के सोशल ऑडिट में 10 लाख 91 हजार से ज्यादा शिकायतें आई हैं, जो व्यवस्था में गड़बडि़यों की सुबूत हैं।

    शिवराज रविवार को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह देश को भ्रमित करना बंद करे। यह समय टकराव का नहीं, सहयोग का है। राजनीति से ऊपर उठकर गांव और गरीब के हित में काम करने की जरूरत है।

    'विकास का विरोध करने का रहा इतिहास'

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास विकास का विरोध करने का रहा है। चाहे संसद हो या सड़क, कांग्रेस हर उस पहल का विरोध करती है जिससे गांव, गरीब और मजदूर को वास्तविक लाभ मिलने वाला होता है। लोकसभा में विकसित भारत और जी-रामजी कानून पर हुई बहस का उल्लेख करते हुए शिवराज ने कहा कि कांग्रेस ने पूरी बात सुनने का साहस तक नहीं दिखाया।

    शिवराज सिंह ने लगाया ये आरोप

    उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे अपनी बात रखना चाहते थे, तब उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई। यदि तर्कों में दम होता तो कांग्रेस पूरी बात सुनती और जवाब देती। मनरेगा के बारे में शिवराज ने कहा कि एक समय यह योजना ईमानदार रोजगार की बजाय भ्रष्टाचार का बड़ा माध्यम बन गई थी। मजदूरों की जगह ठेकेदारों से काम कराया जाने लगा था। मशीनों से काम दिखाकर मजदूरी निकाल ली जाती थी। एक ही सड़क को हर साल नई बताकर भुगतान उठा लिया जाता था। यहां तक कि 80 साल के मजदूरों और फर्जी हाजिरी के रिकार्ड भी सामने आए।

    खड़ा किया ये सवाल

    उन्होंने यूपीए और मोदी सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने अब तक ग्रामीण विकास पर आठ लाख 48 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि यूपीए शासन में यह राशि दो लाख करोड़ रुपये ही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी राशि खर्च होने के बावजूद क्या कांग्रेस के समय गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियां बनीं और क्या मजदूरों का जीवन वास्तव में बदला।

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