Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    'आपने भगवान को भी नहीं छोड़ा', सबरीमाला सोने की चोरी मामले में पर सुप्रीम कोर्ट

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:54 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला सोने की चोरी मामले में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य केपी शंकरदास को झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने केरल हाई कोर्ट क ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    सबरीमाला मामले में सुप्रीम सुनवाई। (फाइल)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य केपी शंकरदास को सु्प्रीम कोर्ट के बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सबरीमाला सोने की चोरी के मामले में कोरल हाई कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने से इनकार कर दिया।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और एएसी शर्मा की बेंच ने कहा कि शंकरदास, जिन्होंने देवस्वोम बोर्ड की मीटिंग के मिनट्स पर साइन थे, वे चोरी के मामले की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

    सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की टिप्पणी हटाने से किया इनकार

    जजों ने हाई कोर्ट के फैसले से पांच पैराग्राफ हटाने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि देवस्वोम बोर्ड के सदस्य केपी शंकरदास और विजयकुमार सोने की चोरी के मामले में जिम्मेदार थे। कोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर हाईकोर्ट की टिप्पणियों में दखल का कोई कारण नहीं है।

    पहले के एक आदेश में केरल हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने कहा था कि देवस्वोम बोर्ड के सदस्य शंकरदास और विजयकुमार सोने की चोरी के मामले में जिम्मेदार थे।

    शंकरदास ने की राहत की मांग

    अपनी याचिका में शंकरदास ने तर्क दिया था कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुने बिना उनके खिलाफ टिप्पणियां की हैं, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए राहत की मांग की थी।

    टिप्पणियों के खिलाफ हाई कोर्ट जा सकते हैं- सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर शंकरदास अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो कानून के अनुसार, इस पर योग्यता के आधार पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि शंकरदास सिंगल जज बेंच के आदेश के आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने के आदेश के लिए हाई कोर्ट सकते हैं।

    यह भी पढ़ें- 'बरामद सोने से कहीं अधिक गायब आभूषण', सबरीमाला मामले में SIT जांच में खुलासा