मिलिए उन ट्रांसजेंडर से जिन्होंने लंबी लड़ाई के बाद हासिल किया वो मुकाम, की सभी बोले 'वाह'
आज ट्रांसजेंडर को लेकर समाज में सोच बदल रही है। इसके बावजूद इनकी राह आसान नहीं है। आज जिन्हें हम ट्रांसजेंडर सेलिब्रिटी के रूप में जानते हैं उन्होंने भी काफी कुछ सहा है।
नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। ट्रांसजेंडर एक ऐसा शब्द है जिसको कभी बेहद घृणा की दृष्टि से देखा जाता था। लेकिन भारत में इसको लेकर मुहिम चलने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय देने के बाद अब लोगों की सोच इनको लेकर बदलने लगी है। फिर भी जिन लोगों ने खुद की पहचान एक ट्रांसजेंडर सेलिब्रिटी के तौर पर बनाई है उनके लिए वह राह कभी आसान नहीं रही। तेनजिन मारिको हो या फिर पद्मिनी या फिर अंजलि, इन सभी की कहानी एक जैसी ही है। आइए आज एक नजर इन पर डाल ली जाए।
तेनजिन मारिको तिब्बत की पहली ट्रांसजेंडर मॉडल हैं। कभी बौद्ध भिक्षु रही मारिको के लिए यहां तक का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। 2016 में उनका पहली बार मीडिया में जिक्र आया था। एक लड़के के रूप में जन्म लेने के बाद वह हमेशा से ही अपने अंदर एक छिपी महिला को देखती थीं। जब वह 15 वर्ष की थीं तब उन्होंने लड़कियों की तरह जीवन जीने का साहसिक फैसला लिया। इस फैसले के बाद उन्हें अपनों की ही दुतकार भी सहनी पड़ी। हर जगह उनका मजाक उड़ाया जाता था। तेनजिन का जन्म हिमाचल प्रदेश में हुआ है। उनका शुरुआती नाम तेनजिन उगेन मारिको था। 1990 में उनका परिवार हिमाचल प्रदेश के बीर में आया था।
वह जब बौद्ध भिक्षु के तौर पर दीक्षा ले रहे थे तब भी उन्हें अपने अंदर छिपी लड़की के होने का अहसास होता था। बाद में उन्होंने लिंग परिवर्तन कराने जैसा बड़ा फैसला लिया और इसको अमली जामा भी पहना दिया। इसके लिए उन्होंने अपनी बौद्ध धर्म की दीक्षा को भी बीच में ही छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला लिया। मारिको को पहनावे को लेकर भी अपने समुदाय का काफी विरोध झेलना पड़ा है। जब वे पहली बार बौद्ध भिक्षु के कपड़ों में मठ के अंदर गईं तो लोगों ने उनका स्वागत किया लेकिन दूसरे दिन जब वे पैंट पहन कर गईं तो लोग हैरान थे।
आपको बता दें कि तेनजिन पेशे से मेकअप आर्टिस्ट और डांसर भी हैं। 2015 में धर्मशाल में हुए मिस तिब्बत प्रतियोगिता के दौरान वह पहली बार एक डांसर के रूप में मंच पर उतरी थीं। उन्होंने लिंग परिवर्तन करने के बाद दिल्ली में अपने एक दोस्त के साथ शादी भी की है। उनका विग लगाकर डांस करते हुए एक वीडियो तिब्बती समुदाय में काफी वायरल हुआ था। लेकिन उनका यह बदलाव तिब्बती समुदाय को रास नहीं आया। धर्मशाला में उनपर अभद्र टिप्पणी तक की गई। वहां पर उन्हें फोलो-मोलो कहकर पुकारा गया, जो ट्रांसजेंडर के लिए एक अपमानजनक टिप्पणी है।
तेनजिन की तरह ही तमिलनाडु की पद्मिनी की भी कहानी है। उनका जीवन भी लंबे संघर्ष की कहानी है। आपको बता दें कि पद्मिनी भारत की पहली ट्रांसजेंल न्यूज एंकर हैं। 2014 में उन्होंने एक टीवी चैनल से इसकी शुरुआत की थी। यहीं से उनकी पहचान भी बनी।
इसके अलावा अंजलि लामा का नाम भी इसी फहरिस्त का एक हिस्सा है। नेपाल के एक किसान परिवार में जन्म लेने वाली अंजली लामा किसी इंटरनेशनल फैशन शो में वॉक करने का सपना देखती थीं। उनका यह सपना 2017 में पूरा हुआ जब वह भारत में हुए लैक्मे फैशन वीक में रैंप पर उतरीं। इसके साथ ही वह नेपाल की पहली ट्रांसजेडर मॉडल बन गईं। लिंग परिवर्तन कराने से पहले अंजलि नबिन वाहिबा के नाम से जानी जाती थीं। अंजलि को कुछ मैगजीन भी अपने कवर पेज पर ले चुकी हैं। उनके मुताबिक साल 2005 में डॉक्टरी टेस्ट से पता चला कि वे ट्रांसजेंडर है तो उनकी दुनिया ही बदल गयी। लोगों का उन्हें देखने का नजरिया ही बदल गया। इसके बाद लोग फब्तियां कसते थे फिर मैं अपने रिश्तेदारों के पास शहर चली गई लेकिन हालात तो शहर में गाँव से भी ज्यादा बदतर थे। शुरुवात में किसी ने भी सपोर्ट नहीं किया। मैं नेपाल की पहली ट्रांसजेंडर इंटरनेशनल मॉडल बनना चाहती थी लेकिन ना मेरे पास पैसा था और ना ही नेटवर्क! अपना सपना पूरा करने की चाह मुझे हिंदुस्तान खींच लाई।
वेरोनिका कैंपबेल भारत की सबसे पहली ट्रांसजेंडर प्लस साइज मॉडल हैं। लैक्मे फैशन वीक 2017 में वह पहली बार रैंप पर उतरी थीं। वेरोनिका कैंपबेल इस फैशन शो के चौथे दिन वेंडेल रोड्रीक्स के लिए रैंप पर उतरी थीं।
सत्य श्री शर्मिला देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील हैं। तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में नाम दर्ज की उन्होंने इस क्षेत्र में इतिहास बना दिया। उन्हें उम्मीद है कि इस समुदाय के लोग अच्छा काम करेंगे और देश भर में उच्च पदों पर आसीन होंगे।
ट्रांसजेंडर्स समुदाय के लिए भारत में पहली बार किसी मॉडलिंग एजेंसी की शुरुआत हुई। ट्रांसजेंडर्स के लिए काम करने वाली 'मित्र ट्रस्ट' ने यह पहल की है। इस ट्रस्ट की संस्थापक रुद्राणी छेत्री भी ट्रांसजेंडर हैं। वह काफी समय से ट्रांसजेंडरों के लिए काम कर रही हैं।
पृथिका देश की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस अधिकारी हैं। लंबी कानूनी जंग के बाद वह तमिलनाडु की पुलिस में सब-इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुईं। उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया था कि वह नियमों में बदलाव करे, ताकि राज्य पुलिस बल में ट्रांसजेंडरों की भर्ती की जा सके। लिंग परिवर्तन से पहले वह प्रदीप कुमार के नाम से पहचानी जाती थीं।
जोयिता मंडल देश की पहली ट्रांसजेंडर जज बन हैं। वो इस समुदाय के उन चंद लोगों में से एक हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी कठिनाईयों से लड़ते हुए एक सफल मुकाम को प्राप्त किया है। पढ़ाई से लेकर नौकरी पाने तक उन्हें हर कदम पर लोगों से भेद-भाव का सामना करते हुए आगे बढ़ना पड़ा, लेकिन आज लोग उनकी इज्ज़त करते हैं।
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