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    राजनाथ ने कहा, 'पहले दें राहत फिर करें नुकसान का आकलन'

    By Rajesh NiranjanEdited By:
    Updated: Fri, 17 Apr 2015 10:13 PM (IST)

    बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। प्रदेश सरकार किसानों को पहले फौरी राहत दे, इसके बाद नुकसान का आकलन करती रहे। मदद से किसान को मानसिक संतुष् ...और पढ़ें

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    कानपुर, जागरण संवाददाता। बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। प्रदेश सरकार किसानों को पहले फौरी राहत दे, इसके बाद नुकसान का आकलन करती रहे। मदद से किसान को मानसिक संतुष्टि मिल जाएगी। यह बातें गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कानपुर देहात के माती मुख्यालय में शुक्रवार को किसानों की सभा को संबोधित करते हुए कहीं।

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    उन्होंने कहा कि किसान हताश न हों, केंद्र सरकार उनके साथ खड़ी है। आज प्रदेश में दी जा रही राहत की असलियत परखने आया हूं। यहां कुर्सी और दफ्तरों में बैठकर नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है। गृहमंत्री ने कहा कि मैं राजनीति करने नहीं आया हूं और न प्रदेश सरकार से झगड़ा करने, बस यही कहना है कि खेतों में जाए बगैर नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता है। प्रदेश सरकार को सीख देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश व हरियाणा की सरकारों ने किसानों से वसूली बंद कर दी है। जरूरतमंदों को अनाज और नमक तक दिया जा रहा है, उत्तर प्रदेश सरकार को भी वैसा ही काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री के विदेश यात्रा से लौटते ही किसानों को शत प्रतिशत मुआवजा दिलाने की बात करेंगे। उन्होंने कहा यात्रा से पहले मुआवजे का आकलन जो 50 फीसद नुकसान पर किया जा रहा था उसे प्रधानमंत्री ने घटाकर 35 फीसद कर दिया था।

    राजनाथ बोले भूमि अधिग्रहण बिल के बारे में लोग भ्रांतियां फैला रहे हैं। यह बिल पहले की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित है, इसमें किसानों को नौकरी, मुआवजा, शहर के लोगों को दोगुना और गांवों को चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। मैं किसान का बेटा हूं, इसलिए जानता हूं कि जब तक किसान धनवान नहीं होगा तब तक देश बलवान नहीं होगा।

    गोली चले तो मुंहतोड़ जवाब देना

    गृहमंत्री बोले कि पांच माह पहले पाक ने गोलीबारी की तो बीएसएफ अधिकारियों ने मुझसे कहा हम जवाब में आठ सालों से सफेद झंडा दिखा रहे हैं। तब मैंने निर्देश दिया कि पहली गोली मत चलाना पर यदि कोई देश ऐसी हरकत करे तो मुंहतोड़ जवाब देना। अब घटनाएं बंद हो गई हैं। कश्मीर में अलगाववादी नेता मसरत आलम पाक के झंडे लहरा रहे थे। वहां की सरकार से कड़ाई से बात की तो मसरत को फिर जेल भेज दिया गया।

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