मणिपुर: कुकी और मैतेयी के बीच विवाद के 20 मुद्दे, बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद बातचीत की राह आसान
बीरेन सिंह ने रविवार को मणिपुर के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। अब माना जा रहा है कि डेढ़ साल से अधिक समय से हिंसाग्रस्त राज्य में स्थायी शांति के लिए बातचीत की राह आसान हो गई है। कुकी और मैतेयी समुदाय के बीच विवाद के 20 मुद्दों की पहचान कर ली गई है जिनमें से 14 मुद्दों को दोनों समुदाय आपसी बातचीत सुलझाने के लिए तैयार हैं।

नीलू रंजन, जागरण, नई दिल्ली। मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के इस्तीफे से डेढ़ साल से अधिक समय से हिंसाग्रस्त राज्य में स्थायी शांति के लिए बातचीत की राह आसान हो गई है। स्थायी शांति के लिए बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कुकी बीरेन सिंह की मांग पर अड़े हुए थे।
दरअसल, कुकी और मैतेयी समुदाय के बीच विवाद के 20 मुद्दों की पहचान कर ली गई है, जिनमें से 14 मुद्दों को दोनों समुदाय के नेता आपसी बातचीत सुलझाने के लिए तैयार हैं। बाकी छह मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए केंद्र सरकार बिचौलिये की भूमिका निभा सकता है।
दोनों समुदाय के बीच विश्वास का संकट गहरा
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मणिपुर हाईकोर्ट के गलत फैसले की वजह से शुरू हुई हिंसा के बाद कुकी और मैतेयी समुदाय के बीच के पुराने विवाद फिर से खड़े हो गए, जिनसे पीछे हटने को कोई भी तैयार नहीं था।
दोनों समुदायों के बीच विश्वास का संकट इतना गहरा था कि आमने-सामने बातचीत के लिए भी तैयार नहीं थे। केंद्र सरकार के प्रयासों से धीरे-धीरे इसे दूर करने की कोशिश की गई और अब दोनों समुदाय के नेता आपसी बातचीत से अधिकांश मुद्दों के हल के तैयार हो गए हैं।
राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार
माना जा रहा है कि बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद जल्द ही दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी। बातचीत को गति देने के लिए मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्यपाल अजय भल्ला को पूरी कमान सौंपने पर भी विचार किया जा रहा है।
पांच साल तक गृह सचिव रह चुके भल्ला मणिपुर की समस्या के पूरी तरह से अवगत हैं और मैतेयी व कुकी नेताओं को बातचीत के लिए राजी करने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
जिन मुद्दों पर बातचीत के लिए आपसी सहमति नहीं पा रही है, उनमें कुकी समुदाय द्वारा अपने प्रभुत्व वाले इलाकों के लिए अलग राज्य की मांग और मैतेयी समुदाय द्वारा म्यांमार से घुसपैठ को रोकने के लिए कड़े प्रविधान करने की जैसी मांगें है।
मणिपुर के पूरे क्षेत्रफल का इंफाल घाटी केवल 10 फीसद हिस्सा है, जहां 60 फीसद आबादी रहती है। इनमें अधिकांश मैतेयी हैं।
बाकी बचे 90 फीसद इलाके में 40 फीसद जनजातीय आबादी है, जिनमें कुकी भी शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मैतेयी और कुकी के साथ-साथ विभिन्न जनजातीय समुदायों के बीच भी समय-समय पर हिंसक झड़पें होती रही हैं।
हिंसा रोकने के लिए उठाए गए कई कदम
इसके पहले तात्कालीक तौर पर हिंसा को रोकने और शांति स्थापित करने के लिए कदम जरूर उठाए गए, लेकिन विवाद के सभी मुद्दों स्थायी समाधान नहीं हुआ।
एक मई 2023 को भड़की हिंसा के पहले केंद्र सरकार की पहल से कुकी, मैतेयी और व अन्य जनजाति समुदायों के बीच विवाद सुलझाने की कोशिश अंतिम चरण में पहुंच गई थी। जाहिर है अब नए सिरे से इस पर काम करना होगा।
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