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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 24, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Simla Agreement: क्या है शिमला समझौता, जिसे स्थगित करने की गीदड़ भभकी दे रहा पाकिस्तान?

Published: Thu, 24 Apr 2025 07:10 PM (IST)Updated: Thu, 24 Apr 2025 07:44 PM (IST)

शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 1972 में हुआ एक महत्वपूर्ण समझौता है। पाकिस्तान ने हाल ही में इस ...और पढ़ें

पाकिस्तान ने गीदड़ भभकी दी है कि वो शिमला समझौते को स्थगित कर सकता है।
पाकिस्तान ने गीदड़ भभकी दी है कि वो शिमला समझौते को स्थगित कर सकता है।

HighLights

  1. 2 जुलाई 1972 को दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था।
  2. पाकिस्तान ने हमेशा शिमला समझौते का उल्लंघन ही किया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।  पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) के बाद भारत सरकार ने राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को जबरदस्त चोट पहुंचाई है। मोदी सरकार ने पांच बड़े फैसले लिए, जिसमें सिंधु समझौते स्थगित करना जैसे कड़े फैसले लिए गए।

पाकिस्तान ने भी भारत के फैसलों पर जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की एक बैठक गुरुवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई। पाकिस्तान ने गीदड़ भभकी दी है कि वो शिमला समझौते को स्थगित कर सकता है।

शिमला समझौता 1972

1971 के युद्ध में पाकिस्तान को भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए गए थे। युद्ध के करीब 16 महीने बाद हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो की मुलाकात हुई थी।

2 जुलाई 1972 को दोनों देशों के बीच हुई बैठक में एक समझौता पर दस्तखत किया गया था, जिसे शिमला समझौता कहा जाता है। समझौते का मूल उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को सुधारना था। बता दें कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना लिया गया था।

 वहीं, हमारे देश के कुछ सैनिकों को भी पाकिस्तान ने बंदी बना लिया था। समझौते के बाद दोनों देशों की सैनिकों की रिहाई हुई। युद्ध के दौरान भारत ने पाकिस्तान के जमीन पर कब्जा कर लिया था। समझौते के बाद इसे वापस कर दिया गया।

1971 का जब युद्ध की समाप्ति हुई तो भारत और पाकिस्तान के बीच की सीजफायर लाइन को लाइन ऑफ कंट्रोल के बीच तब्दील कर दिया गया। समझौते में यह तय किया गया था कि दोनों में से कोई भी देश इस रेखा को बदलने की कोशिश नहीं करेगा।

शिमला समझौते की बड़ी बातें

पाकिस्तान ने बार-बार किया उल्लंघन

पाकिस्तान ने शिमला समझौते का कई बार उल्लंघन किया है। पड़ोसी मुल्क ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बावजूद कभी नहीं इसे माना। पाकिस्तान हमेशा से कश्मीर मुद्दे को United Nation और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। वहीं, वो लगातार सीजफायर का उल्लंघन करता रहा है।

जिस पाकिस्तान ने कभी भी बल प्रयोग नहीं करने की बात कही थी, उसने 1999 में कारगिल में घुसपैठ की। हालांकि, पाकिस्तान को इस बार भी मुंह की खानी पड़ी।

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आतंक का सहारा ले रहा पाकिस्तान 

युद्ध मैदान में भारत से मिली हार का बदला लने के लिए पाकिस्तान ने आंतकी संगठनों को सहारा लेना शुरू कर दिया। पाकिस्तान की सेना और ISI आतंकी संगठनों को पोषित करती है। आतंकियों को भारत भेजकर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने का हर मुमकिन प्रयास करती है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बल उसके नापाक इरादे को हर बार नाकाम कर देता है।

शिमला समझौता से जुड़ी अधिक जानकारी पढ़ें यहां

आइए ये भी जान लें कि दोनों देशों के बीच सिंधु जल समझौता क्या था?

  • साल 1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के बीच यह समझौता हुआ था।
  • समझौते में सिंधु बेसिन से बहने वाली 6 नदियों को पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में बांटा गया था।
  • पूर्वी हिस्से की नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के पानी पर भारत का पूरा अधिकार है।
  • वहीं, पश्चिमी हिस्से की नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम का 20 प्रतिशत पानी भारत रोक सकता है।
  • 65 साल बाद भारत ने इस समझौते को स्थगित करने की घोषणा कर दी है।

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पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिए ये पांच बड़े फैसले

  • 960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेगी, जब तक कि पाकिस्तान विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को त्याग नहीं देता।
  • एकीकृत चेक पोस्ट अटारी को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। जो लोग वैध अनुमोदन के साथ सीमा पार कर चुके हैं, वे 01 मई 2025 से पहले उस मार्ग से वापस आ सकते हैं।
  • पाकिस्तानी नागरिकों को सार्क वीजा छूट योजना (एसवीईएस) वीजा के तहत भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पाकिस्तानी नागरिकों को अतीत में जारी किए गए किसी भी एसवीईएस वीजा को रद्द माना जाएगा। एसवीईएस वीजा के तहत वर्तमान में भारत में मौजूद किसी भी पाकिस्तानी नागरिक के पास भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे हैं।
  • नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग में रक्षा/सैन्य, नौसेना और वायु सलाहकारों को अवांछित व्यक्ति घोषित किया जाता है। उनके पास भारत छोड़ने के लिए एक सप्ताह का समय है। पाकिस्तान में मौजूद भारतीय उच्चायोग से अपने रक्षा/नौसेना/वायु सलाहकारों को भारत वापस बुलाएगा। संबंधित उच्चायोगों में ये पद निरस्त माने जाएंगे। सेवा सलाहकारों के पांच सहायक कर्मचारियों को भी दोनों उच्चायोगों से वापस बुलाया जाएगा।
  • उच्चायोगों की कुल संख्या को वर्तमान 55 से घटाकर 30 किया जाएगा, जिसे 01 मई 2025 तक और कम किया जाएगा।

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